Alwar में मंत्री Sanjay Sharma सफाईकर्मियों की नियुक्ति के लिए धरने पर बैठे

By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Aug 12, 2026

राजस्थान के वन राज्य मंत्री संजय शर्मा सफाई कर्मचारियों की नियुक्ति के मुद्दे पर बुधवार को अलवर नगर निगम कार्यालय परिसर में कर्मचारियों के साथ धरने पर बैठ गए और जिलाधिकारी पर निशाना साधा। शर्मा ने कहा कि जब तक सफाई कर्मचारियों को नियुक्तिपत्र नहीं मिल जाते और उनकी नियुक्ति नहीं हो जाती, तब तक वह धरना स्थल से नहीं उठेंगे। मंत्री ने सफाई कर्मचारियों की नियुक्ति में कथित देरी को लेकर जिलाधिकारी और नगर निगम आयुक्त के प्रति कड़ी नाराजगी जताई।

उन्होंने कहा कि बुधवार सुबह वाल्मीकि समुदाय के कुछ सदस्य उनके आवास पर पहुंचे और उन्हें बताया कि अधिकारियों ने नियुक्तिपत्र देने से इनकार कर दिया है। शर्मा ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘मैंने जिलाधिकारी से बात की, लेकिन उनका रवैया नकारात्मक था। वह अपने रुख पर अड़ी हुई थीं और मामले को सुलझाने के लिए तैयार नहीं थीं।

इसलिए मैं नगर निगम कार्यालय आया और समुदाय के सदस्यों के साथ धरने पर बैठ गया।’’ उन्होंने कहा, ‘‘मैंने मुख्यमंत्री कार्यालय को भी इस मामले की जानकारी दी है।’’ जिलाधिकारी अर्तिका शुक्ला से इस संबंध में बात नहीं हो सकी। कांग्रेस की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा, ‘‘अगर मंत्री अपनी ही सरकार के घोटालों के खिलाफ धरने पर बैठ जाएं, तो सोचिए...सरकार में भाजपाई भ्रष्टाचार का आलम क्या है।’’ डोटासरा ने कहा, ‘‘जब मंत्री स्वयं नौकरशाही पर बेईमानी, लूट-खसोट और मनमानी करने जैसे गंभीर आरोप लगा रहे हैं, तो सोचिए अराजकता की स्थिति कितनी भयावह है।’’ उन्होंने कहा कि अलवर में सफाई कर्मचारियों की नियुक्ति के मुद्दे पर वन मंत्री संजय शर्मा का धरने पर बैठना और जिलाधिकारी व नगर निगम आयुक्त पर गंभीर आरोप लगाना भाजपा सरकार की प्रशासनिक व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। डोटासरा ने कटाक्ष करते हुए कहा, ‘‘जनता सब देख रही है और ढाई साल बाद इस अराजक और भ्रष्ट व्यवस्था की विदाई तय है।’’ राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भी इस मामले को लेकर राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, ‘‘भाजपा सरकार की असलियत अलवर में खुलकर सामने आ गई है।

सफाई कर्मचारियों को नियुक्तिपत्र तक नहीं मिल रहे और खुद राज्यमंत्री संजय शर्मा को अपनी ही सरकार के नगर निगम के खिलाफ धरने पर बैठना पड़ा। यह भाजपा शासन में प्रशासनिक तंत्र के पूरी तरह चरमरा जाने का सबूत है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘जिलाधिकारी से बात करने के बावजूद जब अधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं की, तो मंत्री को खुद सड़क पर बैठकर आंदोलन करना पड़ा। यह दिखाता है कि भाजपा राज में मंत्री सिर्फ नाम के हैं, जबकि असली फैसले नौकरशाही की मर्जी से होते हैं।’’ जूली ने कहा, ‘‘जिस सरकार का अपना मंत्री ही न्याय के लिए भटकता फिरे, वह गरीब सफाई कर्मचारियों और आम जनता को क्या इंसाफ देगी?’’ राज्य सरकार के कामकाज पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘यह सरकार नहीं चल रही, बल्कि अफसरशाही के भरोसे लड़खड़ा रही है।

भाजपा को यह बताना चाहिए कि जब उसका अपना मंत्री ही व्यवस्था से त्रस्त है, तो जनता किस मुंह से इस सरकार पर भरोसा करे।

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