SEBI के आरोपों पर Rajesh Mehta का पलटवार, बोले- Revenue आंकड़ों को समझने में हुई चूक

By Ankit Jaiswal | Jun 04, 2026

देश के पूंजी बाजार में चर्चा का विषय बने राजेश एक्सपोर्ट्स प्रकरण में अब कंपनी की ओर से भी विस्तृत प्रतिक्रिया सामने आई है। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों के बाद कंपनी के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक राजेश मेहता ने कहा है कि उनकी कंपनी ने कोई गलती नहीं की है और सभी वित्तीय आंकड़े पूरी तरह सही हैं।

मौजूद जानकारी के अनुसार राजेश मेहता ने कहा कि सेबी समेकित राजस्व और मूल्य संवर्धन से जुड़े आंकड़ों को लेकर भ्रमित हो गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्विट्जरलैंड स्थित कंपनी की सहायक इकाई वालकांबी सोने की खरीद, प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन का कारोबार करती है। उनके अनुसार नियामक ने केवल मूल्य संवर्धन के आंकड़ों को आधार बनाया है, जबकि कंपनी ने समेकित कुल राजस्व के आंकड़े प्रस्तुत किए हैं।

राजेश मेहता का कहना है कि वित्त वर्ष 2020-21 से 2024-25 के बीच कंपनी ने लगभग 15.5 लाख करोड़ रुपये का समेकित राजस्व दर्ज किया था और यह आंकड़ा पूरी तरह सही है। उन्होंने दावा किया कि कंपनी द्वारा घोषित किसी भी राजस्व को बढ़ा-चढ़ाकर नहीं दिखाया गया है।

गौरतलब है कि सेबी ने अपने आदेश में कहा था कि कंपनी ने लगभग 15.15 लाख करोड़ रुपये के समेकित राजस्व को गलत तरीके से प्रस्तुत किया हो सकता है। नियामक के अनुसार यह राशि संबंधित अवधि में कंपनी द्वारा दर्शाए गए कुल समेकित राजस्व का लगभग 99.80 प्रतिशत हिस्सा थी। सेबी का मानना है कि इससे निवेशकों के सामने कंपनी की वास्तविक वित्तीय स्थिति से अलग तस्वीर प्रस्तुत हुई है।

इस बीच कंपनी ने 4 जून को शेयर बाजार को दी गई जानकारी में भी अपने पक्ष को दोहराया है। कंपनी ने कहा कि उसके द्वारा घोषित राजस्व पूरी तरह सही हैं और राजस्व को बढ़ाकर दिखाने का कोई मामला नहीं है। कंपनी ने यह भी बताया कि वह सेबी को सभी आवश्यक दस्तावेज और स्पष्टीकरण उपलब्ध कराने की प्रक्रिया में है ताकि मामले के हर पहलू को स्पष्ट किया जा सके।

बता दें कि सेबी की कार्रवाई के बाद निवेशकों की चिंता बढ़ गई है। इसका असर कंपनी के शेयरों पर भी दिखाई दिया। कारोबार के दौरान राजेश एक्सपोर्ट्स के शेयर राष्ट्रीय शेयर बाजार में पांच प्रतिशत के निचले सर्किट पर पहुंच गए और 103.92 रुपये पर बंद हो गए थे।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला केवल एक कंपनी तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे कॉरपोरेट पारदर्शिता, वित्तीय खुलासों की विश्वसनीयता और निवेशक संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे भी जुड़े हुए हैं। फिलहाल बाजार की नजर सेबी की आगे की जांच, कंपनी द्वारा पेश किए जाने वाले दस्तावेजों और संभावित नियामकीय कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

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