By रेनू तिवारी | Apr 28, 2026
वैश्विक तनाव और सीमा विवादों के बीच, भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में अपने चीनी समकक्ष एडमिरल डोंग जून से मुलाकात की। शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के रक्षा मंत्रियों की बैठक के इतर हुई इस उच्च स्तरीय वार्ता ने एक बार फिर भारत-चीन संबंधों को पटरी पर लाने की उम्मीदें जगा दी हैं।
बैठक के दौरान दोनों नेताओं के बीच चर्चा का मुख्य केंद्र 'क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता' रहा। राजनाथ सिंह और एडमिरल डोंग जून ने दोनों देशों के बीच सैन्य संचार (Military Communication) माध्यमों को और अधिक मजबूत करने की आवश्यकता पर सहमति जताई। यह कदम सीमाओं पर गलतफहमी को दूर करने और किसी भी अप्रिय स्थिति को रोकने के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
तनाव कम करने की दिशा में बड़ा कदम
यह बैठक एक ऐसे नाजुक समय में हुई है जब भारत और चीन 2020 में पूर्वी लद्दाख की वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर हुई हिंसक झड़पों के बाद से अपने संबंधों को सामान्य बनाने की कोशिश कर रहे हैं। 2019 से भारत के रक्षा मंत्री के रूप में कमान संभाल रहे राजनाथ सिंह ने द्विपक्षीय वार्ता के दौरान भारत की संप्रभुता और अखंडता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को भी स्पष्ट किया।
रवाना होने से पहले, रक्षा मंत्री ने कहा था कि वह SCO के अन्य सदस्य देशों के अपने समकक्षों के साथ-साथ किर्गिस्तान की राजधानी में रहने वाले भारतीय समुदाय के साथ भी द्विपक्षीय बातचीत करेंगे।
राजनाथ ने X (पहले ट्विटर) पर पोस्ट किया था, "दुनिया में मौजूद सुरक्षा चुनौतियों के बीच, मैं वैश्विक शांति के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को रेखांकित करूँगा; इसके अलावा, आतंकवाद और उग्रवाद के प्रति 'शून्य सहनशीलता' (Zero Tolerance) के भारत के निरंतर रुख को भी दोहराऊँगा।"
SCO, जो 2001 में स्थापित एक अंतर-सरकारी संगठन है, के रक्षा मंत्रियों की बैठक इस वर्ष ऐसे समय में हो रही है जब अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष के कारण दुनिया भर में उथल-पुथल मची हुई है। इसलिए, नेताओं द्वारा इस संघर्ष को सुलझाने और यह सुनिश्चित करने के तरीकों पर चर्चा किए जाने की संभावना है कि इस क्षेत्र पर इसका कम से कम प्रभाव पड़े।
भारत ने अपनी ओर से हमेशा यह रुख बनाए रखा है कि सभी मुद्दों का समाधान बातचीत और कूटनीति के माध्यम से सौहार्दपूर्ण ढंग से किया जाना चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सभी वैश्विक नेताओं के साथ टेलीफोन पर बातचीत की है, और मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष को तत्काल समाप्त करने पर ज़ोर दिया है।