By अंकित सिंह | Dec 03, 2022
बेंगलुरु में गीता जयंती महोत्सव में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि भारत के ज्ञान के भंडार को दुनिया ने स्वीकार किया और अपनाया है। अपने संबोधन में राजनाथ सिंह ने कहा कि भौतिक सफलता के बावजूद लोगों को आध्यात्मिक कल्याण की तलाश है, आधुनिकता के बावजूद हम अपने अस्तित्व के सवालों के जवाब खोजने के लिए अध्यात्म का दरवाजा ही खटखटाते हैं। उन्होंने साफ शब्दें में कहा कि भारत के ज्ञान के भंडार को दुनिया ने स्वीकार किया और अपनाया है। उन्होंने आगे कहा कि हमें गीता को केवल एक धार्मिक ग्रंथ के रूप में नहीं देखना चाहिए, यह प्रेरणा का स्रोत है। हम गीता की सलाह का पालन करके सही विकल्प चुनने और जीवन की कई समस्याओं को हल करने में सक्षम होंगे और स्वयं सहायता पुस्तकों की आवश्यकता नहीं होगी।
रक्षा मंत्री ने कहा कि हरि अनंत हरि कथा अनंता' की भांति गीता भी मैं समझता हूं अनंत है, और इसकी व्याख्या अनंत है। अब तक जिन ग्रंथों के सर्वाधिक भाष्य मिलते हैं, गीता उनमें से एक है। स्वामी विवेकानंद, महात्मा गांधी से लेकर पंडित नेहरू, महर्षि अरविंदो, लोकमान्य तिलक ने गीता को अपने-अपने ढंग से देखा है। उन्होंने कहा कि गीता हमें ऐसा सूत्र प्रदान करती है, जिसके सहारे हम अपनी आत्मा का दर्शन कर सकते हैं। आज इंसान को बाहरी दुनिया की बड़ी चिंता रहती है। दिल्ली में क्या हो रहा है, अमेरिका में क्या हो रहा है, लंदन में, फ्रांस में क्या घटित हो रहा है, उसे बड़ी चिंता रहती है। पर हमारे मन में क्या घटित हो रहा है, हम किस ओर जा रहे हैं, इसे देखने के लिए अपने अंतस में झाँकने की फुर्सत किसी को नहीं होती है। हम बाहरी दुनिया में इतने खोये होते हैं कि उसमें ही सुख ढूँढ़ते हैं।