By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Feb 22, 2020
इस सप्ताह के मुद्दों की बात करें तो राम मंदिर ट्रस्ट की पहली बैठक संपन्न हुई जिसमें ट्रस्ट का सांगठनिक ढाँचा तो सामने आया ही यह भी साफ हो गया कि अब राम मंदिर निर्माण का कार्य जल्द से जल्द शुरू होगा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भूमि पूजन के लिए अयोध्या जा सकते हैं। विपक्ष की माँग है कि जिस तरह राम मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट का गठन किया गया है उसी तरह मस्जिद के निर्माण के लिए भी ट्रस्ट बनाया जाये।
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने अब दायित्व संभाल लिया है कि अयोध्या में बनने वाला राम मंदिर दुनिया का सबसे विशाल, भव्य और दिव्य मंदिर बने। देखा जाये तो ईसाइयों का तीर्थ वेटिकन सिटी 110 एकड़ और मक्का मस्जिद 99 एकड़ में है। ट्रस्ट इससे ज्यादा इलाके में राम मंदिर तीर्थ का विस्तार करने की योजना बना रहा है। ट्रस्ट के पास अभी राम मंदिर के लिए 70 एकड़ की जमीन है। ट्रस्ट के कुछ सदस्यों ने आसपास की संभावित जमीनों का जायजा भी लिया है। अरविंदो आश्रम 3 एकड़ जमीन देने को तैयार है। सूत्रों के मुताबिक, ट्रस्ट 111 एकड़ में राम मंदिर तीर्थ का निर्माण करने पर विचार कर रहा है। अयोध्या का राम मंदिर आकाश को छूने वाला तो होगा ही साथ ही अयोध्या नगरी को भी इस तरह सजाया संवारा जायेगा कि वह धार्मिक दृष्टि से पूरी दुनिया में सबसे बड़ा उदाहरण बने। इसके अलावा ट्रस्ट की पहली बैठक में इस बात पर करीब-करीब यह आम राय बन चुकी है कि राम मंदिर का मॉडल वही रहेगा, जो विश्व हिन्दू परिषद ने बनवाया था। इस तरह के भी संकेत हैं कि रामलला जोकि अभी टैंट में विराजमान हैं उनको एक भवन में स्थापित किया जाये।
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ट्रस्ट की पहली बैठक से जो बातें और साफ हुईं वह यह थीं कि राम जन्मभूमि न्यास के महंत नृत्य गोपाल दास ट्रस्ट के अध्यक्ष और विश्व हिंदू परिषद के चंपत राय को ट्रस्ट का महासचिव बनाया गया है। जब मोदी सरकार ने ट्रस्ट के गठन का ऐलान किया था तो अपना नाम नहीं पाकर महंत नृत्य गोपाल दास और विश्व हिन्दू परिषद के पदाधिकारी नाराज हो गये थे लेकिन सरकार ने एक योजना के तहत दो सदस्यों को नामित करने का अधिकार ट्रस्ट को सौंप दिया था और ट्रस्ट ने महंत नृत्य गोपाल दास और विश्व हिन्दू परिषद के उपाध्यक्ष चंपत राय को इसमें शामिल कर अध्यक्ष और महासचिव की जिम्मेदारी प्रदान कर दी। यदि सरकार सीधे इन लोगों को नामित करती तो उस पर तमाम उंगलियां उठ सकती थीं।
ट्रस्ट ने एकमत से राम मंदिर निर्माण समिति के चेयरमैन का जिम्मा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पूर्व प्रधान सचिव नृपेंद्र मिश्र को सौंपा गया है। नृपेंद्र मिश्रा प्रधानमंत्री मोदी के करीबी माने जाते हैं और उनकी कई अहम परियोजनाओं को मूर्त रूप दे चुके हैं। नृपेंद्र मिश्रा को यह जिम्मेदारी मिलना दर्शाता है कि भवन निर्माण की गति और गुणवत्ता पर सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी निगाह रखेंगे। ट्रस्ट के सदस्यों ने अपनी पहली बैठक के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर उनका आभार जताया और अब भक्तों को इंतजार है भव्य राममंदिर के निर्माण कार्य शुरू होने का।
इसके अलावा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का आगामी सप्ताह में होने वाला भारत दौरा भी इस सप्ताह चर्चा में रहा क्योंकि ट्रंप अपनी भारत यात्रा के लिए बेहद उत्साहित दिख रहे हैं और सार्वजनिक रूप से कभी यह कह रहे हैं कि मेरा स्वागत करने के लिए 70 लाख लोग आ रहे हैं तो कभी कह रहे हैं कि मेरा स्वागत करने के लिए 1 करोड़ लोग मौजूद रहेंगे। देखा जाये तो ट्रंप की यात्रा से पहले ही यह साफ हो चुका है कि भारत और अमेरिका कोई बड़ी ट्रेड डील नहीं करने जा रहे हैं इसलिए सवाल उठ रहे हैं कि ट्रंप की इस यात्रा का उद्देश्य कहीं इस वर्ष होने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावों में अनिवासी भारतीयों के वोट हासिल करना तो नहीं है। खास बात यह है कि ट्रंप भारत यात्रा पर तो आ रहे हैं लेकिन पाकिस्तान नहीं जा रहे हैं इसलिए भी इस यात्रा पर पूरी दुनिया की निगाहें लगी हुई हैं।
इसके अलावा शाहीन बाग का मुद्दा इस सप्ताह भी उलझन की स्थिति में ही बना रहा। सुप्रीम कोर्ट ने वार्ताकार दल का गठन कर शाहीन बाग के लोगों को समझाने के लिए भेजा लेकिन यह दल तीन दिन धरना स्थल पर बातचीत के लिए गया और लगभग खाली हाथ वहाँ से लौट आया। अब देखना होगा कि यह सुप्रीम कोर्ट को क्या रिपोर्ट सौंपते हैं और कोर्ट उस पर क्या निर्णय लेता है। जहाँ तक सरकार की बात है तो प्रधानमंत्री ने इसी सप्ताह एक बार फिर साफ कर दिया कि नागरिकता संशोधन कानून को किसी कीमत पर वापस नहीं लिया जायेगा।