साकार होने को है ताउम्र का सपना, गोरक्षपीठ की तीन पीढ़ियों के संघर्ष का साक्षी होगा राम मंदिर

By प्रेस विज्ञप्ति | Aug 05, 2023

लखनऊ। उनका ताउम्र एक ही सपना था। अयोध्या में रामजन्मभूमि पर भव्य राम मंदिर का निर्माण हो। तीन साल पहले आज ही की तारीख थी, जब इस सपने को साकार करने की बुनियाद पड़ी। शीघ्र ही यह अपनी पूरी भव्यता के साथ दिखने भी लगेगा।

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इसके पहले राम मंदिर के बाबत सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद राम मंदिर न बनने तक, टेंट से हटाकर चांदी के सिंहासन पर एक अस्थायी ढांचे में ले जाने का काम भी योगीजी ने ही किया था। दिसंबर 1949 में तब अयोध्या में रामलला के प्रकटीकरण के समय उनके दादागुरु ब्रह्मलीन गोरक्षपीठाधीश्वर दिग्विजयनाथ अयोध्या में ही मौजूद थे। यही नहीं 1986 में जब मन्दिर का ताला खुला तो बड़े महराज यानी ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ अयोध्या में मौजूद थे। इतिहास में ऐसी तीन पीढिय़ा मिलना विरल हैं, जिन्होंने एक दूसरे के सपनों को न केवल अपना बनाया, बल्कि इसके लिए शिद्दत से संघर्ष भी किया। नतीजा सबके सामने है।

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