By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Aug 23, 2026
रांची में पुलिस और नौकरी के इच्छुक अभ्यर्थियों के बीच हुई झड़प के सिलसिले में शनिवार को 14 नामजद और 200 से अधिक अज्ञात लोगों के खिलाफ कम से कम तीन प्राथमिकी दर्ज की गईं। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। ये प्राथमिकी सरकारी कामकाज में कथित तौर पर बाधा डालने और पुलिस के साथ झड़प करने के आरोप में रांची के कोतवाली थाने में दर्ज की गईं।
झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी, रांची की महापौर रोशनी खलखो, भाजपा विधायक सी. पी. सिंह और अन्य नेता कोतवाली थाने पहुंचे और करीब तीन घंटे तक वहां रहे। मरांडी ने कहा, ‘‘यह झारखंड पुलिस की गुंडागर्दी का एक उदाहरण है। जिस तरह से पुलिस ने महिला को हिरासत में लिया, उससे साफ तौर पर लगता है कि उसे प्रताड़ित किया गया।
सरकार लोगों की आवाज दबाने की कोशिश कर रही है, लेकिन इस सरकार को पता होना चाहिए कि आप जितना आवाज दबाने की कोशिश करेंगे, वह उतनी ही बुलंद होगी।’’ मरांडी ने आरोप लगाया कि शुक्रवार को पुतला दहन जुलूस के दौरान प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ झारखंड सरकार के ‘‘गुंडों’’ और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) कार्यकर्ताओं ने जिस तरह का व्यवहार किया, उसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘अगर महिला के खिलाफ पहले से कोई मामला दर्ज था, तो पुलिस को उसे नोटिस देना चाहिए था, न कि आंदोलन में शामिल होने के बाद उसे हिरासत में लेकर थाने लाना चाहिए था। पुलिस अपने अधिकारों के लिए लड़ रहे प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मामले दर्ज करके उन्हें हिरासत में ले रही है, जबकि झामुमो कार्यकर्ताओं को संरक्षण दे रही है।’’ हालांकि, पुलिस के एक अधिकारी ने कहा कि महिला को शुक्रवार की झड़प के सिलसिले में हिरासत में नहीं लिया गया था।
उन्होंने कहा, ‘‘हम उसे करीब दो महीने पहले सदर थाने में उसके खिलाफ दर्ज एक मामले के सिलसिले में थाने लाए।’’ अधिकारियों के अनुसार, झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध में प्रदर्शन कर रहे छात्रों और पुलिस के बीच शुक्रवार को रांची में झड़प हो गई थी। प्रदर्शनकारियों ने झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कांग्रेस नेता राहुल गांधी के पुतले जलाने की कोशिश की थी। ‘जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मंच’ के बैनर तले छात्र नेताओं ने राज्य सरकार पर नौकरी के इच्छुक अभ्यर्थियों को ‘‘धोखा देने’’ और ‘‘विश्वासघात’’ करने का आरोप लगाया है।
यह आरोप 11वीं और 13वीं जेपीएससी परीक्षाओं तथा जेएसएससी-सीजीएल के जरिए की गई नियुक्तियों को रद्द करने संबंधी कुछ अधिसूचनाओं पर उच्च न्यायालय द्वारा रोक लगाए जाने के बाद लगाया गया। उच्च न्यायालय ने बाल विकास परियोजना अधिकारी (सीडीपीओ) और जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा के जरिए नियुक्त किए गए अभ्यर्थियों की नियुक्तियां रद्द करने संबंधी अधिसूचनाओं पर शुक्रवार को रोक लगा दी। बृहस्पतिवार को अदालत ने 11वीं और 13वीं झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) परीक्षाओं को रद्द करने संबंधी अधिसूचनाओं पर रोक लगाई थी और खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की नियुक्तियां रद्द करने के आदेश पर भी रोक लगा दी थी।