By अंकित सिंह | Oct 08, 2021
कर्ज में डूबी सरकारी एयरलाइन एयर इंडिया के अधिग्रहण की बोली टाटा संस ने जीत ली है। इसके बाद रतन टाटा ने एयर इंडिया के अधिग्रहण के लिये टाटा संस की 18,000 करोड़ रुपये की बोली स्वीकार करने के सरकार के निर्णय का स्वागत किया। इसको लेकर रतन टाटा ने एक ट्वीट किया जिसमें उन्होंने लिखा कि टाटा समूह की एयर इंडिया के लिए बोली जीतना अच्छी खबर है! बेशक एयर इंडिया को फिर से बनाने के लिए काफी प्रयास करने होंगे, लेकिन उम्मीद है कि यह विमानन उद्योग में टाटा समूह की उपस्थिति के लिए एक बहुत मजबूत बाजार अवसर प्रदान करेगा।
टाटा समूह में एयर इंडिया की वापसी
इसके साथ ही टाटा समूह में एयर इंडिया की वापसी हुई है। जहांगीर रतनजी दादाभाई (जेआरडी) टाटा ने 1932 में एयरलाइन की स्थापना की। तब इसे टाटा एयरलाइंस कहा जाता था। 1946 में टाटा संस के विमानन प्रभाग को एयर इंडिया के रूप में सूचीबद्ध किया गया था और 1948 में एयर इंडिया इंटरनेशनल को यूरोप के लिए उड़ानों के साथ शुरू किया गया था। अंतरराष्ट्रीय सेवा भारत में पहली सार्वजनिक-निजी भागीदारी में से एक थी, जिसमें सरकार की 49 प्रतिशत, टाटा की 25 प्रतिशत और जनता की शेष हिस्सेदारी थी। 1953 में एयर इंडिया का राष्ट्रीयकरण किया गया था। सरकार सरकारी स्वामित्व वाली एयरलाइन में अपनी 100 प्रतिशत हिस्सेदारी बेच रही है, जिसमें एयर इंडिया की एआई एक्सप्रेस लिमिटेड में 100 प्रतिशत हिस्सेदारी और एयर इंडिया एसएटीएस एयरपोर्ट सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड में 50 प्रतिशत हिस्सेदारी शामिल है।