RBI का मास्टरस्ट्रोक! गिरते Rupee को थामने और Foreign Investment खींचने के लिए बदले कई नियम।

By Ankit Jaiswal | Jun 05, 2026

वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितताओं और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारतीय रिजर्व बैंक ने रुपये को मजबूती देने और विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए कई अहम कदमों की घोषणा की है। इन फैसलों के बाद मुद्रा बाजार में सकारात्मक माहौल देखने को मिला और रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मजबूत होकर बंद हुआ।

घोषणाओं के बाद अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपये ने मजबूती दिखाई। रुपया 95.72 प्रति डॉलर के स्तर पर खुला और कारोबार के दौरान 95.24 प्रति डॉलर तक पहुंच गया। यह पिछले कारोबारी सत्र की तुलना में लगभग 50 पैसे की मजबूती को दर्शाता है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आरबीआई की घोषणाओं से निवेशकों का भरोसा बढ़ा है।

बता दें कि भारतीय रिजर्व बैंक ने लगातार दूसरी मौद्रिक नीति बैठक में ब्याज दरों को स्थिर रखने का फैसला किया है। केंद्रीय बैंक फिलहाल ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी और पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के आर्थिक प्रभावों का आकलन कर रहा है।

गौरतलब है कि हाल के महीनों में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये पर दबाव देखने को मिला था। इसकी एक प्रमुख वजह वैश्विक स्तर पर बढ़ती भू-राजनीतिक अनिश्चितता और ऊर्जा बाजार में अस्थिरता रही है। ऐसे समय में विदेशी पूंजी निवेश को प्रोत्साहित करना भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

आरबीआई ने सरकारी प्रतिभूतियों में विदेशी निवेश को आसान बनाने के लिए कई नियमों में बदलाव किया है। केंद्रीय बैंक ने पूर्ण पहुंच मार्ग के तहत अब 15 वर्ष, 30 वर्ष और 40 वर्ष की अवधि वाली सभी नई सरकारी प्रतिभूतियों को शामिल करने का फैसला किया है। इसके अलावा सामान्य मार्ग से निवेश करने वाले विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों के लिए अल्पकालिक निवेश, निवेश सीमा और एकल प्रतिभूति निवेश से जुड़े कई प्रतिबंधों को भी हटा दिया गया है।

मौजूद जानकारी के अनुसार भारतीय मूल के विदेशों में रहने वाले नागरिकों और विदेशी भारतीय नागरिकों के लिए भी सूचीबद्ध शेयरों में निवेश की सीमा बढ़ाई गई है। साथ ही सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को विदेशी वाणिज्यिक ऋण लेने के लिए विशेष विदेशी मुद्रा विनिमय सुविधा उपलब्ध कराने की घोषणा की गई है।

आरबीआई ने यह भी कहा है कि निर्यात आय प्राप्त करने की समय सीमा को फिर से नौ महीने कर दिया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इन कदमों से विदेशी मुद्रा प्रवाह बढ़ने और बाजार में तरलता बेहतर होने की संभावना है।

इस दौरान संजय मल्होत्रा ने स्पष्ट किया कि आरबीआई किसी विशेष विनिमय दर को लक्ष्य नहीं बनाता है। उनके अनुसार रुपये का मूल्य बाजार की मांग और आपूर्ति के आधार पर तय होता है। हालांकि यदि अत्यधिक उतार-चढ़ाव या सट्टेबाजी के कारण बाजार में अस्थिरता पैदा होती है तो केंद्रीय बैंक हस्तक्षेप करने से पीछे नहीं हटेगा।

उन्होंने यह भी कहा कि भारत का विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत स्थिति में है और बाहरी झटकों का सामना करने के लिए पर्याप्त सुरक्षा कवच प्रदान करता है। साथ ही आरबीआई के पास कई नियामकीय और बाजार आधारित साधन उपलब्ध हैं, जिनका उपयोग आवश्यकता पड़ने पर किया जा सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में आरबीआई के ये कदम भारतीय अर्थव्यवस्था और रुपये दोनों के लिए सकारात्मक संकेत माने जा रहे हैं।

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