By अंकित सिंह | Jan 05, 2026
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भगवत ने बुधवार को कहा कि परिवारों के बीच संवाद की कमी ही उनके द्वारा लव जिहाद कहे जाने वाले मामलों का मुख्य कारण है, और उन्होंने जोर देकर कहा कि इसे रोकने के प्रयास घर से ही शुरू होने चाहिए। भोपाल में स्त्री शक्ति संवाद कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भगवत ने माता-पिता से आत्मनिरीक्षण करने का आग्रह किया कि एक लड़की किसी अजनबी से कैसे प्रभावित हो सकती है और परिवारों के भीतर संवाद और नैतिक मूल्यों के महत्व पर बल दिया।
महिलाओं की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए भगवत ने कहा कि बच्चे के नैतिक मूल्य पहले 12 वर्षों तक घर में ही आकार लेते हैं, जिसमें माँ की भूमिका सबसे अहम होती है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि पुरुषों और महिलाओं के बीच समानता अनिवार्य है और कहा कि अस्थिरता और पिछले हमलों के कारण ऐतिहासिक रूप से महिलाओं पर प्रतिबंध लगाए गए थे, लेकिन अब परिस्थितियाँ बदल गई हैं। भगवत ने आगे कहा कि लव जिहाद को रोकने के लिए सामाजिक स्थिरता सुनिश्चित करने हेतु तीन स्तरों पर प्रयास आवश्यक हैं।
इन टिप्पणियों पर तीखी राजनीतिक प्रतिक्रियाएं आईं। एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भगवत के बयान के आधार पर सवाल उठाते हुए कहा कि वयस्कों को अपने फैसले लेने का कानूनी अधिकार है। महाराष्ट्र के अमरावती में बोलते हुए ओवैसी ने कहा कि अगर "लव जिहाद" हो रहा है, तो संसद में आंकड़े पेश किए जाने चाहिए। उन्होंने भाजपा और मोहन भगवत से इस शब्द की परिभाषा देने और पिछले 11 वर्षों के आंकड़े उपलब्ध कराने को कहा, साथ ही यह भी कहा कि रोजगार, चीन और लद्दाख जैसे बड़े मुद्दों पर उनका कोई अधिकार नहीं है।