Jan Gan Man: Parliament Winter Session के लिए सरकार के एजेंडे में जगह नहीं पा सके असली सामाजिक मुद्दे

By नीरज कुमार दुबे | Nov 25, 2025

संसद का शीतकालीन सत्र आगामी 1 दिसंबर से शुरू होकर 19 दिसंबर तक चलेगा। इस दौरान कुल 15 कार्य दिवसों में 10 विधेयक पेश करने की योजना है। हम आपको बता दें कि सरकार के एजेंडे में कई अहम प्रस्ताव शामिल हैं जैसे- परमाणु ऊर्जा विधेयक, 2025 जोकि निजी कंपनियों के लिए असैन्य परमाणु क्षेत्र को खोलने का प्रावधान करेगा। भारत उच्च शिक्षा आयोग विधेयक जोकि विश्वविद्यालयों और संस्थानों को अधिक स्वायत्त और उत्कृष्ट बनाने का मार्ग प्रशस्त करेगा। राष्ट्रीय राजमार्ग (संशोधन) विधेयक जोकि भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को तेज़ और पारदर्शी बनाएगा। कॉरपोरेट कानून (संशोधन) विधेयक, 2025 जोकि ‘Ease of Doing Business’ को और सुगम करने के लिए कंपनी अधिनियम और एलएलपी अधिनियम में संशोधन लाएगा। प्रतिभूति बाजार संहिता (SMC) विधेयक, 2025 जोकि– सेबी अधिनियम, डिपॉजिटरी अधिनियम और प्रतिभूति अनुबंध अधिनियमों को एकीकृत कर एक समान कानून बनाएगा। मध्यस्थता और सुलह अधिनियम संशोधन जोकि कानूनी प्रक्रिया में पारदर्शिता लायेगा। इसके अलावा पहले सत्र के दो लंबित विधेयक और वर्ष का पहला अनुपूरक बजट भी विचार के लिए रखे जाएंगे। देखा जाये तो यह एजेंडा निश्चित रूप से आर्थिक और प्रशासनिक सुधारों की दिशा में एक कदम है। परंतु सवाल यह है कि क्या संसद केवल कॉरपोरेट, व्यापार और संस्थागत सुधारों तक सीमित रह जाएगी?


बहरहाल, संसद के शीतकालीन सत्र में नए विधेयक स्वागत योग्य हैं, परंतु यदि संसद जनता के असली दर्द और सामाजिक असंतुलन के प्रश्नों पर मौन रही, तो ये विधेयक केवल विकास के आंकड़ों में जुड़ेंगे, जनहित में नहीं।

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