Sunderkand Path: सुंदरकांड का पाठ करने से जीवन में आती है पॉजिटिविटी, जानिए महत्व और नियम

By अनन्या मिश्रा | Jul 05, 2025

सुंदरकांड रामायण का एक अहम और लोकप्रिय भाग है। माना जाता है कि सुंदरकांड का पाठ करने से जीवन में सकारात्मकता आती है और हनुमान जी की कृपा बरसती है। ज्योतिष और पौराणिक मान्यता के मुताबिक हनुमान जी से शनिदेव भी डरते हैं। शनिदेव की दशा के प्रभाव को कम करने के लिए हनुमान जी की पूजा करने की सलाह दी जाती है। वहीं अगर आप शनिवार को सुंदरकांड का पाठ करते हैं, तो हनुमान जी की कृपा प्राप्त होती है और वह प्रसन्न होते हैं। साथ ही शनिदेव भी आपका बुरा नहीं कर पाएंगे। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको सुंदरकांड पाठ के महत्व, इसको करने की सही विधि और मान्यता के बारे में बताने जा रहे हैं।

पूरी होती है इच्छा

हिंदू धर्म में मान्यता है कि सुंदरकांड का पाठ करने से भक्तों की मनोकामना जल्दी पूरी हो जाती हैं। गोस्वामी तुलसीदास द्वारा लिखी गई रामचरितमानस के सात अध्यायों में से 5वां अध्याय सुंदरकांड है। हालांकि रामचरित मानस के सभी अध्याय भगवान की भक्ति के लिए हैं, लेकिन सुंदरकांड का महत्व अधिक है।

सुंदरकांड का पाठ करने के लाभ

सुंदरकांड का पाठ करने वाले भक्तों को हनुमान जी बल देते हैं और आसपास निगेटिव एनर्जी भी नहीं भटक सकती है। जब भी आत्मविश्वास कम हो जाए, या जीवन में आत्मविश्वास कम होने लगे या कोई काम नहीं बन रहा हो, तो सुंदरकांड का पाठ करने से सभी काम खुद से बनने लगते हैं।

मनोवैज्ञानिकों ने भी सुंदरकांड के महत्व को बहुत खास माना है। विज्ञान ने भी इसके महत्व को समझाया है। इसका पाठ करने से भक्त में आत्मविश्वास और इच्छाशक्ति को बढ़ाता है। 

शनिदशा में लाभ

खुद शनिदेव भी हनुमान जी के भक्त हैं और उनसे भय खाते हैं। माना जाता है कि जिन जातकों पर शनि की ढैय्या या फिर साढ़ेसाती चल रही है, तो इन लोगों को रोजाना सुंदरकांड का पाठ करना चाहिए। इससे शनि की महादशा का प्रभाव कम होता है। शनि बिना कुछ बुरा किए इस महादशा की अवधि को गुजार देते हैं।

स्टूडेंट्स को भी सुंदरकांड का पाठ करना चाहिए। इसका पाठ करने से स्टूडेंट्स के अंदर आत्मविश्वास जगेगा और वह सफलता के करीब जाएंगे। आपको शायद मालूम न हो, लेकिन अगर आप सुंदरकांड के पाठ की पंक्तियों का अर्थ जानेंगे, तो जान पाएंगे कि इसमें जीवन की सफलता के सूत्र भी बताए गए हैं। इसलिए सलाह दी जाती है कि अगर कोई रामचरितमानस का पूर्ण पाठ न कर पाए, तो कम से कम सुंदरकांड का पाठ जरूर करना चाहिए।

सुंदरकांड का पाठ

धार्मिक शास्त्रों के मुताबिक घर में रामायण का पाठ रखा जाए, तो पूर्ण पाठ में सुंदरकांड का पाठ घर-परिवार के किसी सदस्य को करना चाहिए। इससे पॉजिटिव एनर्जी का प्रवाह बढ़ता है। रोग दूर होते हैं और दरिद्रता खत्म होती है।

दूर होगा अशुभ ग्रहों का प्रभाव

सुंदरकांड का पाठ करने से घर के सभी सदस्यों के ऊपर से अशुभ ग्रहों से छुटकारा मिलता है। अगर इसका स्वयं पाठ नहीं कर सकते हैं, तो कम से कम घर के सभी सदस्यों को यह पाठ सुनना चाहिए। सुंदरकांड का पाठ करना अशुभ ग्रहों का दोष दूर करने में लाभकारी माना जाता है।

दूर होंगे गृह क्लेश

सुंदरकांड का पाठ करने से गृह क्लेश से छुटकारा मिलता है। इसका पाठ करने से सकारात्मक ऊर्जा आती है। जिससे घर में नकारात्मक शक्तियों से छुटकारा मिलता है। सुंदरकांड का पाठ करने से घर में सकारात्मक माहौल बनता है। घर में किसी के भी द्वारा सुंदरकांड का पाठ किया जाता है, तो यह अधिक फायदेमंद होता है।

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