RERA Annual Report | कई राज्यों के रेरा प्राधिकरण प्रकाशित नहीं कर रहे वार्षिक रिपोर्ट: एफपीसीई

By रेनू तिवारी | Feb 14, 2026

रियल एस्टेट डेस्क देशभर के घर खरीदारों के प्रमुख संगठन फोरम फॉर पीपल्स कलेक्टिव एफर्ट्स (FPCE) ने शुक्रवार को एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। संगठन का आरोप है कि अधिकांश राज्यों के रियल एस्टेट नियामक (RERA) अपने वैधानिक दायित्वों को पूरा करने में विफल रहे हैं, जिससे 'रेरा' कानून का मूल उद्देश्य ही खतरे में पड़ गया है।

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संगठन ने मंत्रालय से आग्रह किया कि वह राज्य सरकारों को अधिनियम की धारा 82 और 83 के तहत शक्तियों का उपयोग करने और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के लिए कहे। एफपीसीई के अध्यक्ष अभय उपाध्याय ने कहा कि जब तक पुख्ता डेटा यह साबित न कर दे कि रेरा लागू होने के बाद घरों का कब्जा मिलने और कार्यप्रणाली की निष्पक्षता में बेहतरी आई है, तब तक सफलता के सभी दावे खोखले एवं बेबुनियाद हैं।

उन्होंने कहा, निर्दोष घर खरीदारों के साथ छल किया जा रहा है और इस बार इसके लिए रेरा का सहारा लिया जा रहा है। बिल्डरों के लिए यह कानून अब महज़ एक ऐसा प्रमाण-पत्र बन गया है, जिसकी आड़ में वे बिना किसी जवाबदेही के अपनी परियोजनाएं बेच रहे हैं।

एफपीसीई ने कहा कि कर्नाटक, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और गोवा ने रेरा के लागू होने के बाद से एक भी वार्षिक रिपोर्ट प्रकाशित नहीं की है। वहीं, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और तेलंगाना जैसे नौ राज्यों ने रिपोर्ट प्रकाशित करना शुरू किया था, लेकिन अब इसे बंद कर दिया है।

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