By नीरज कुमार दुबे | Sep 09, 2019
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की महत्वपूर्ण वार्षिक तीन दिवसीय अखिल भारतीय समन्वय बैठक राजस्थान के पुष्कर में संपन्न हुई। इस बैठक की खास बात यह रही कि एक तरफ जहाँ मोदी सरकार अपने कार्यकाल के 100 दिनों की उपलब्धियों का प्रचार कर रही है वहीं भाजपा के मातृ संगठन समझे जाने वाले आरएसएस ने इस बैठक में इस बात की समीक्षा की कि समाज के विभिन्न वर्गों को इस दौरान क्या-क्या परेशानी हुई और सरकार से इंतजामों में कहाँ कमी रह गयी। देश के समक्ष ज्वलंत मुद्दों जैसे सीमा सुरक्षा, अनुच्छेद 370, कश्मीर में नेताओं की नजरबंदी, मॉब लिंचिंग, एनआरसी, आरक्षण और अर्थव्यवस्था में नरमी जैसे अहम मुद्दों पर इस बैठक में चर्चा हुई। बैठक के समापन पर संघ के सह सर कार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले ने स्पष्ट किया कि आरएसएस का मानना है कि आरक्षण तब तक जारी रहना चाहिए जब तक इसके लाभार्थियों को लगता है कि यह जरूरी है। संघ का स्पष्ट कहना है कि हमारे समाज में सामाजिक और आर्थिक विषमता है, इसलिए आरक्षण की जरूरत है...हम संविधान प्रदत्त आरक्षण का पूरा समर्थन करते हैं।
इसे भी पढ़ें: अनुच्छेद 371 में ऐसा क्या है, जो इसे बरकरार रखना चाहती है मोदी सरकार
लोकसभा चुनाव 2019 के बाद आरएसएस की यह पहली अखिल भारतीय समन्वय बैठक है। इसमें संघ से जुड़े 35 संगठनों के 200 से ज्यादा प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। इस बैठक में भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा, संगठन महासचिव बीएल संतोष और महासचिव राम माधव ने भी भाग लिया। संघ की इस महत्वपूर्ण बैठक में जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त किए जाने और उसके बाद घाटी में हालात पर भी एक प्रजेंटेशन दिया गया। यह प्रेजेंटेशन स्वयं भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने दी। नड्डा ने कश्मीर घाटी में समग्र स्थिति सुधारने के लिए सरकार की विभिन्न योजनाओं के बारे में भी जानकारी साझा की। संविधान के अनुच्छेद 370 के ज्यादातर प्रावधानों को समाप्त करने के नरेन्द्र मोदी सरकार के फैसले का बैठक में संघ के सदस्यों ने ‘दिल खोल कर जोरदार तालियों के साथ स्वागत किया।’’ उन्होंने इस फैसले को संगठन की विचारधारा के अनुरूप बताया। आरएसएस समर्थित ‘पूर्व सैनिक सेवा परिषद’ ने भी कश्मीर में मौजूदा हालात और देश में सुरक्षा हालात पर अपने विचार रखे और सलाह दी।
संघ की इस तीन दिवसीय बैठक में सीमा सुरक्षा के संबंध में सबसे ज्यादा चर्चा की गयी और देश में राष्ट्र भक्त लोग कैसे तैयार किए जाएं इसके लिए एक योजना भी बनाई गई। आरएसएस की ओर से सीमा पर आने वाले लोगों और खासकर युवाओं को जोड़ने के लिए 'सीमा को सलाम' नाम से एक अभियान भी जल्द ही शुरू किया जायेगा।
इसे भी पढ़ें: 100 दिनों में हर दिन भारत को एक उपलब्धि दिलायी मोदी सरकार ने
पुष्कर में तीन दिन चली इस बैठक में 14 सत्र हुए। शनिवार को पहले दिन आरएसएस के महासचिव सुरेश भैय्याजी जोशी ने इसे संबोधित किया। संघ के सरकार्यवाह मोहन भागवत ने नौ सितंबर को समापन समारोह को संबोधित किया। बैठक में पर्यावरण से लेकर अर्थव्यवस्था सहित तमाम मुद्दों पर चर्चा हुई। ‘स्वदेशी जागरण मंच’ और ‘भारतीय मजदूर संघ’ ने देश की अर्थव्यवस्था में आयी नरमी के बारे में अपने विचार रखे तो विश्व हिन्दू परिषद ने उच्चतम न्यायालय में अयोध्या मामले पर रोज हो रही सुनवायी की पृष्ठभूमि से जुड़ी पूरी जानकारी बैठक में साझा की। इस समन्वय बैठक की खास बात यह रही कि ना इस बैठक में कोई फैसला हुआ और ना ही कोई प्रस्ताव पारित किया गया।
संघ की इस वार्षिक समन्वय बैठक का एक अन्य आकर्षण प्रदर्शनी भी रही। प्रदर्शनी में दलित नायक बीआर आंबेडकर और सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव छाए रहे। इस प्रदर्शनी में विभिन्न जनजातियों और अनुसूचित जातियों के नेताओं की संक्षिप्त जीवनी को भी दर्शाया गया, जिनमें से ज्यादातर राजस्थान के हैं। प्रदर्शनी का आयोजन समन्वय बैठक के दौरान संघ की मारवाड़ इकाई द्वारा किया गया। प्रदर्शनी में गुरु नानक का बड़ा चित्र इसलिए लगाया गया क्योंकि यह उनका 550वां जयंती वर्ष है, जबकि आंबेडकर एक दलित नायक हैं। ये प्रदर्शनी संघ के सामाजिक समरसता के विचारों के अनुकूल ही दिखी।
-नीरज कुमार दुबे