By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Oct 30, 2026
डेटा सिक्योरिटी काउंसिल ऑफ इंडिया (डीएससीआई) ने कृत्रिम मेधा (एआई) के दायित्व पर भारत-केंद्रित एक दिशा-निर्देश शुक्रवार को जारी किए। इसका उद्देश्य यह बताना है कि कंपनियों द्वारा ‘एजेंटिक एआई’ को अपनाए जाने के साथ जवाबदेही और जिम्मेदारी को किस तरह समझा एवं तय किया जाना चाहिए। इसमें नए मानक प्रस्तावित करने के बजाय यह बताया गया है कि स्वायत्त और कई विक्रेताओं वाली एआई प्रणालियों पर पहले से लागू बाध्यकारी कानूनी सिद्धांत किस तरह लागू होते हैं। साथ ही, एआई को इस्तेमाल में लाने वाली पूरी मूल्य श्रृंखला में जिम्मेदारी किसकी है, इसका खाका भी पेश किया गया है।
दिशा-निर्देश में ‘एजेंटिक एआई’ के विभिन्न क्षेत्रों, ऐसी प्रणालियों से उत्पन्न होने वाले प्रभावों तथा जोखिमों के प्रकारों एवं जवाबदेही तय करने वाले कारकों को भी शामिल किया गया है। डीएससीआई ने कहा कि इस दस्तावेज का उद्देश्य कंपनियों के भीतर एआई के सुरक्षित इस्तेमाल के लिए संदर्भ सामग्री उपलब्ध कराना है। यह एक सतत चर्चा पत्र है, जिसे विभिन्न उद्योग क्षेत्रों से मिले सुझावों के आधार पर समय-समय पर अद्यतन किया जाएगा। दिशा-निर्देश में यह भी कहा गया है कि भारत के लिए शासन, निगरानी और दायित्व तय करने का एक आनुपातिक तथा स्पष्ट दृष्टिकोण महत्वपूर्ण है।
इससे उपयोगकर्ता उद्योग को सही दिशा देने और जिम्मेदार एआई को तेजी से अपनाने में मदद मिलेगी। यह दिशा-निर्देश डीएससीआई की वेबसाइट पर उपलब्ध हैं। डीएससीआई के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) विनायक गोडसे ने कहा कि इस मार्गदर्शन का उद्देश्य एआई के कामकाज और सुरक्षा से जुड़ी चर्चाओं को ‘‘सिद्धांत से व्यवहार तक’’ ले जाना है। उन्होंने कहा कि इस चर्चा में मूल्य श्रृंखला के हर पक्ष को शामिल किया जाना चाहिए, चाहे वह मॉडल बनाने वाला हो या उन्हें लागू करने और इस्तेमाल करने वाला। उन्होंने कहा कि संगठनों को निर्णय लेने के स्पष्ट दायरे और ऐसे साधनों की जरूरत है, जिन्हें वे लागू कर सकें।
गोडसे ने कहा, ‘‘एआई ऐसी परिस्थितियां और जोखिम पैदा करता है, जिनका अनुमान लगाने के लिए हम अभी पूरी तरह तैयार नहीं हैं। इसलिए, रूपरेखा इतनी अनुकूल होनी चाहिए कि उभरने वाले जोखिमों से निपटा जा सके। डीएससीआई दायित्व संबंधी मार्गदर्शन को व्यवहार में लागू करने योग्य बनाने के लिए सरकार और उद्योग के साथ काम करने को उत्सुक है।’’
विज्ञप्ति के अनुसार, यह परामर्श विशेष रूप से अंतिम उपयोगकर्ता संगठनों, सेवा प्रदाताओं और एकीकरणकर्ताओं, उत्पाद कंपनियों और स्टार्टअप, उपकरण एवं रूपरेखा प्रदाताओं तथा कंप्यूटिंग और मेधा सेवाएं उपलब्ध कराने वालों के लिए प्रासंगिक है। डीएससीआई ने कंपनियों के शीर्ष प्रबंधन के अधिकारियों, एआई अधिकारियों, सरकारी निकायों, थिंक टैंक, शैक्षणिक संस्थानों, कानूनी निकायों और मुख्य जोखिम अधिकारियों से वास्तविक परिस्थितियों में एआई के इस्तेमाल के आधार पर इस दिशा-निर्देश को परखने का आग्रह किया है।
संगठन यह जानना चाहता है कि इसमें क्या छूटा है और कौन-सी बातें व्यावहारिक कसौटी पर खरी नहीं उतरतीं। कंपनियों के बीच ‘एजेंटिक एआई’ का इस्तेमाल बढ़ने के साथ इससे जुड़ी चिंताएं भी बढ़ रही हैं। इस पृष्ठभूमि में डीएससीआई के ये दिशा-निर्देश महत्वपूर्ण हो जाते हैं। ‘एजेंटिक एआई’ ऐसी कृत्रिम मेधा (एआई) प्रणाली है, जो केवल सवालों के जवाब देने या सुझाव देने तक सीमित नहीं रहती बल्कि किसी लक्ष्य को पूरा करने के लिए खुद योजना बना सकती है, फैसले ले सकती है और कई चरणों में काम भी कर सकती है।