सत्ता गंवाने के बाद TMC में महा-विद्रोह: ममता बनर्जी ने पार्टी विरोधी गतिविधियों के लिए दो विधायकों को निकाला, बंगाल की सियासत में हड़कंप!

By रेनू तिवारी | Jun 01, 2026

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में सत्ता से बाहर होने के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर सुलग रही असंतोष की आग अब खुलकर सामने आ गई है। पार्टी आलाकमान ने कड़ा रुख अपनाते हुए सोमवार को अपने दो मौजूदा विधायकों— संदीपान साहा और ऋतब्रत बनर्जी को पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त होने के आरोप में तत्काल प्रभाव से निष्कासित कर दिया है। इस बड़ी कार्रवाई ने उन अटकलों पर मुहर लगा दी है कि चुनाव में करारी हार के बाद पार्टी नेताओं और विधायकों का एक बड़ा धड़ा ममता बनर्जी के नेतृत्व से नाराज चल रहा है और तृणमूल के भीतर एक बड़ा बिखराव शुरू हो चुका है।

TMC द्वारा जारी एक आधिकारिक और सख्त बयान के अनुसार, इन दोनों विधायकों के खिलाफ कार्रवाई की तात्कालिक वजह पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी के कालीघाट स्थित आवास पर रविवार को बुलाई गई एक महत्वपूर्ण आपातकालीन बैठक रही। 2026 के चुनावी नतीजों के बाद पार्टी के भविष्य और रणनीति को लेकर बुलाई गई इस समीक्षा बैठक से संदीपान साहा और ऋतब्रत बनर्जी, दोनों ही नदारद रहे। इसके अलावा, पार्टी ने अपने बयान में साफ तौर पर कहा है कि यह लगातार देखा जा रहा था कि दोनों विधायक सार्वजनिक मंचों और निजी चर्चाओं में ऐसे बयान दे रहे थे जो ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (AITC) के "हितों के लिए बेहद हानिकारक और नुकसानदेह" थे।

सदस्यता रद्द, छीने गए सारे अधिकार

TMC के शीर्ष नेतृत्व ने इस अनुशासनहीनता को कतई बर्दाश्त न करने का संदेश देते हुए दोनों नेताओं को बाहर का रास्ता दिखा दिया। पार्टी द्वारा जारी निष्कासन पत्र में कहा गया: "इस पूरे मामले पर गंभीर और उचित विचार-विमर्श करने के बाद, ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (AITC) के सक्षम प्राधिकारी ने आपको तत्काल प्रभाव से पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित करने का निर्णय लिया है। परिणामस्वरूप, इस नोटिस के जारी होने की तारीख से आप पार्टी से जुड़े किसी भी पद, जिम्मेदारी, दर्जे या विशेषाधिकार को धारण करने के हकदार नहीं रहेंगे।"

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सत्ता से बेदखल होते ही बगावत के सुर तेज

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम बंगाल में हुए ऐतिहासिक सत्ता परिवर्तन और सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व में बीजेपी की नई सरकार के गठन के बाद से ही तृणमूल के खेमे में भारी बेचैनी है। दस साल से अधिक समय तक सत्ता का सुख भोगने वाली पार्टी के विधायक अब विपक्ष में बैठने को तैयार नहीं हैं।

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अंदरूनी सूत्रों का दावा है कि संदीपान साहा और ऋतब्रत बनर्जी का निष्कासन तो सिर्फ एक शुरुआत है; अंदर ही अंदर कई अन्य विधायक और वरिष्ठ नेता भी पाला बदलने या अपना नया रास्ता चुनने की तैयारी में हैं। ममता बनर्जी ने इन दोनों विधायकों पर गाज गिराकर बाकी असंतुष्टों को एक सख्त चेतावनी देने की कोशिश की है, लेकिन देखना यह होगा कि क्या यह कार्रवाई टीएमसी में मचने वाले संभावित महा-विद्रोह को रोक पाती है या नहीं।

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