By Ankit Jaiswal | Jul 19, 2026
भारत ने डिजिटल सुरक्षा और तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। केंद्र सरकार ने ऐसा प्रदर्शन नेटवर्क शुरू किया है, जो सुरक्षित और बिना किसी छेड़छाड़ भारतीय मानक समय उपलब्ध कराएगा। यह व्यवस्था व्हाइट रैबिट तकनीक पर आधारित है, जो बेहद सटीक समय तालमेल स्थापित करने में सक्षम मानी जाती है।
मौजूद जानकारी के अनुसार इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य देश के लिए एक ऐसा स्वदेशी समय स्रोत तैयार करना है, जो बेहद सटीक और भरोसेमंद हो। आज के डिजिटल युग में समय की थोड़ी सी भी गड़बड़ी कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों को प्रभावित कर सकती है। बैंकिंग लेनदेन, शेयर बाजार में खरीद-बिक्री, दूरसंचार नेटवर्क, बिजली वितरण प्रणाली और परिवहन सेवाओं में माइक्रोसेकंड स्तर तक सही समय का होना बेहद जरूरी माना जाता है।
गौरतलब है कि वर्तमान समय में कई डिजिटल प्रणालियां समय के तालमेल के लिए विदेशी उपग्रह आधारित सेवाओं जैसे जीपीएस पर निर्भर रहती हैं। सरकार का मानना है कि अपनी स्वदेशी समय वितरण प्रणाली विकसित करने से महत्वपूर्ण सेवाओं की सुरक्षा और मजबूती बढ़ेगी। इससे बाहरी स्रोतों पर निर्भरता कम होगी और किसी भी संभावित व्यवधान के समय देश की डिजिटल व्यवस्था अधिक सुरक्षित रह सकेगी।
इस नई प्रणाली में भारतीय मानक समय को देश की आधिकारिक समय निर्धारण संस्था यूटीसी (एनपीएलआई) से जोड़ा गया है। व्हाइट रैबिट तकनीक की मदद से यह नेटवर्क अत्यंत सटीक स्तर पर समय का वितरण कर सकता है। इस तकनीक का इस्तेमाल दुनिया भर में उच्च सटीकता वाले नेटवर्क तालमेल के लिए किया जाता है।
परियोजना के तहत उपभोक्ता मामलों के विभाग, सीएसआईआर-राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला, इसरो, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज और भारत संचार निगम लिमिटेड ने मिलकर समय संचार की जांच भी सफलतापूर्वक पूरी की है। यह परीक्षण बेंगलुरु की प्रयोगशाला और चेन्नई स्थित नेशनल स्टॉक एक्सचेंज केंद्र के बीच किया गया।
केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा है कि भरोसेमंद और स्वदेशी राष्ट्रीय समय स्रोत अब डिजिटल ढांचे का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनता जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था उपभोक्ता हितों की रक्षा, निष्पक्ष व्यापार, साइबर सुरक्षा और डिजिटल अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में मदद करेगी।
गौरतलब है कि यह पहल भारत सरकार के विकसित भारत अभियान और तकनीकी आत्मनिर्भरता के लक्ष्य से भी जुड़ी हुई है। दुनिया के कुछ चुनिंदा देशों के पास ही ऐसी सटीक समय वितरण क्षमता उपलब्ध है। भारत का लक्ष्य अब अपनी स्वतंत्र और सुरक्षित समय प्रणाली विकसित कर वैश्विक स्तर पर अपनी तकनीकी क्षमता को और मजबूत करना है। यह नेटवर्क भविष्य में देश के महत्वपूर्ण डिजिटल क्षेत्रों के लिए एक मजबूत आधार तैयार करने में सहायक साबित हो सकता हैं।