By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Oct 19, 2026
(फिलेम दीपक सिंह) नागोया, 19 अक्टूबर मां के निधन के बाद पिछले दो महीने से परेशान चल रहे रिंकू हुड्डा ने उनके लिए एशियाई पैरा खेलों में स्वर्ण पदक जीतने का संकल्प लिया था और सोमवार को नागोया में उन्होंने ऐसा ही किया। रिंकू ने आइची-नागोया एशियाई पैरा खेलों की पुरुषों की भाला फेंक एफ46 स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर इसे अपनी मां को समर्पित किया। इस स्पर्धा में भारत के अजीत सिंह ने भी रजत पदक जीता।
बाहर से सब ठीक लगता है, लेकिन अंदर से ऐसा नहीं है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘मैं अपनी मां के लिए यह स्वर्ण पदक जीतना चाहता था। इसलिए मैं यह स्वर्ण पदक अपनी मां को समर्पित करना चाहूंगा।’’ हरियाणा के धामड़ गांव के 27 वर्षीय रिंकू को मां के निधन के बाद परिवार के साथ समय बिताने का ज्यादा मौका नहीं मिला क्योंकि 13 दिन की शोक अवधि पूरी होते ही उन्हें प्रशिक्षण के लिए लौटना पड़ा।’’ रोहतक के राजीव गांधी स्टेडियम में प्रशिक्षण लेने वाले रिंकू ने कहा, ‘‘उनका निधन आठ अगस्त को हुआ था। 19 अगस्त को 13वें दिन की रस्म पूरी होते ही मैंने प्रशिक्षण शुरू कर दिया था।
हालांकि, शुरुआत में मैंने हल्का अभ्यास किया।’’ प्रशिक्षण शुरू करते ही रिंकू के कंधे में चोट लग गई जिसके कारण उन्हें करीब तीन सप्ताह तक आराम करना पड़ा। उन्होंने कहा, ‘‘मेरे कंधे में ग्रेड-1 का मांसपेशीय खिंचाव था। इसके बाद मैंने करीब 20 दिन आराम किया।
अब मैं चोट से पूरी तरह उबर चुका हूं।’’ रिंकू ने कहा, ‘‘पहले मैं टेपिंग वगैरह करता था। अब भी टेपिंग करता हूं, लेकिन मुझे दर्द महसूस नहीं हुआ।’’ रिंकू ने 65.11 मीटर भाला फेंककर स्वर्ण पदक जीता और अजीत सिंह को महज नौ सेंटीमीटर से पीछे छोड़ा। अजीत ने 65.02 मीटर के प्रयास के साथ रजत पदक हासिल किया।
रिंकू की जिंदगी तीन साल की उम्र में बदल गई थी जब खेती के दौरान हुए एक हादसे में उनका बायां हाथ कट गया। धान की बुवाई में इस्तेमाल होने वाली मशीन में हाथ फंस जाने के कारण उनका हाथ काटना पड़ा। रिंकू ने 2018 एशियाई पैरा खेलों में कांस्य और 2022 में चीन में आयोजित प्रतियोगिता में रजत पदक जीता था।
उन्होंने 2023 और 2025 की विश्व पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भी क्रमश: रजत और स्वर्ण पदक हासिल किया। हालांकि, उनके पदकों के संग्रह में अब तक पैरालंपिक पदक शामिल नहीं है। रिंकू ने कहा, ‘‘मैंने अभी तक पैरालंपिक में कोई पदक नहीं जीता है।
अब मेरा लक्ष्य यही है। मैं इस पर अधिक ध्यान दूंगा।’’