By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | May 17, 2026
राष्ट्रीय चयनकर्ता जब अफगानिस्तान के खिलाफ श्रृंखला के लिए टेस्ट और एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय टीम चुनने के लिए मंगलवार को गुवाहाटी में बैठक करेंगे तो भारतीय टीम में हैरान करने वाले नाम नहीं होंगे लेकिन लाल गेंद के प्रारूप में उप कप्तान के तौर पर ऋषभ पंत के भविष्य पर गंभीर चर्चा हो सकती है। ऐसा समझा जाता है कि यह भावना बढ़ रही है कि 28 साल के इस तेजतर्रार विकेटकीपर बल्लेबाज को नेतृत्वकर्ता की भूमिका रास नहीं आ रही है। आईपीएल में लखनऊ सुपर जाइंट्स के साथ दो सत्र से ऐसे ही संकेत मिलते हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘उसे खुलकर खेलने का मौका देना चयन समिति के दिमाग में सबसे ऊपर हो सकता है।’’ पंत का मौजूदा फॉर्म चयन समिति की रातों की नींद उड़ा सकता है क्योंकि एकदिवसीय प्रारूप में लोकेश राहुल के बाद दूसरे विकेटकीपर के रूप में उनकी जगह पर सवालिया निशान बना हुआ है। ध्रुव जुरेल, संजू सैमसन और इशान किशन की मौजूदगी में पंत को 50 ओवर के प्रारूप के लिए दबाव महसूस हो सकता है। अगर बीसीसीआई की मेडिकल टीम को जसप्रीत बुमराह के काम के बोझ से कोई दिक्कत नहीं है तो यह सीनियर तेज गेंदबाज एकमात्र टेस्ट खेलेगा लेकिन मौजूदा आईपीएल के दौरान उनके काम के बोझ को देखते हुए तीन मैच की एकदिवसीय श्रृंखला में उनके खेलने की कोई संभावना नहीं है।
सूत्र ने कहा, ‘‘अगर उनके काम के बोझ को लेकर थोड़ी सी भी दिक्कत होती है तो उन्हें पूरी श्रृंखला के लिए आराम दिया जाएगा।’’ मौजूदा आईपीएल सत्र में भारतीय तेज गेंदबाजों के बीच प्रभावी प्रदर्शन करने वाले प्रिंस यादव को श्रीलंका में त्रिकोणीय लिस्ट ए श्रृंखला के लिए नहीं चुना गया है क्योंकि वह अफगानिस्तान के खिलाफ एकदिवसीय श्रृंखला के लिए चुने जाने के मजबूत दावेदार हैं। हालांकि भारत अफगानिस्तान के खिलाफ कोई टी20 अंतरराष्ट्रीय नहीं खेल रहा है लेकिन चयन समिति के सचिव देवजीत सैकिया के साथ सूर्यकुमार यादव के भविष्य के बारे में अनौपचारिक बातचीत करेगी क्योंकि पिछले डेढ़ साल से उनका फॉर्म खराब चल रहा है।
माना जा रहा है कि मुख्य कोच गौतम गंभीर के इनपुट सूर्यकुमार का राष्ट्रीय कप्तान के तौर पर भविष्य तय करने में बहुत काम आएंगे। अगर उन्हें कप्तानी से हटा दिया जाता है तो उनके लिए बल्लेबाज के तौर पर टीम में अपनी जगह बनाए रखना मुश्किल होगा। सबसे सुरक्षित विकल्प यह है कि उन्हें आयरलैंड और इंग्लैंड के खिलाफ अगुआई करने का मौका दिया जाए और उस श्रृंखला में बल्ले से उनके प्रदर्शन को देखते हुए उनके भविष्य पर फैसला किया जाए। लेकिन अब इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि चयनकर्ता उस रास्ते पर चलेंगे।