By अनन्या मिश्रा | Aug 31, 2026
कैंसर का नाम सुनते ही लोग परेशान हो उठते हैं। लेकिन अगर शरीर के हर बदलाव पर नजर रखी जाए, तो किसी भी गंभीर बीमारी का पता आसानी से लगाया जा सकता है। ऐसी ही एक बीमारी टेस्टिकुलर कैंसर है। 15 से 40 वर्ष की आयु के पुरुषों में टेस्टिकुलर कैंसर सबसे आम कैंसरों में से एक है। लेकिन अच्छी बात ये है कि अगर शुरूआती स्टेज में ही इस कैंसर की पहचान हो जाए, तो इस गंभीर बीमारी से आसानी से छुटकारा पाया जा सकता है।
एक रिसर्च के मुताबिक टेस्टिकुलर कैंसर अन्य कैंसर की तुलना में धीमे-धीमे बढ़ता है। इसलिए कई बार लोग इसके लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं। ऐसे में सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि टेस्टिकुलर कैंसर के वार्निंग साइन क्या है, जिसको समय रहते पहचान लिया जाए, तो इस गंभीर बीमारी से निजात पाया जा सकता है।
टेस्टिकुलर कैंसर फाउंडेशन के मुताबिक अगर अंडकोष में लम्प या सूजन की समस्या शुरू हो सकती है। यह सबसे बड़ा संकेत है कि एक अंडकोष में बिना दर्द वाली गांठ या सूजन होना शामिल है। लेकिन हर गांठ कैंसर वाली गांठ नहीं होती है। लेकिन फिर भी किसी नए या असामान्य बदलाव की डॉक्टर से जांच करवानी चाहिए। कुछ पुरुषों को ऐसा महसूस हो सकता है कि एक अंडकोष सामान्य से भारी, बड़ा या अधिक सख्त महसूस हो रहा है।
अगर आपको ऐसा महसूस होता है कि शेप या साइज में अचानक बदलाव हुआ है, तो यह टेस्टिकुलर कैंसर का वार्निंग साइन हो सकता है। इन बदलाव को अपने हेल्थ एक्सपर्ट के साथ शेयर करें।
एक रिपोर्ट के मुताबिक स्क्रोटम में बिना लम्प या गांठ बने भी भारीपन महसूस हो सकता है। इसलिए अगर स्क्रोटम भारीपन महसूस हो, तो इसको नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
पेट के निचले हिस्से, जांघों के जोड़ या अंडकोश में हल्का दर्द या बेचैनी महसूस होना आदि टेस्टिकुलर कैंसर के वार्निंग साइन में शामिल है। अंडकोष में लगातार दर्द रहना, भारीपन महसूस हो, या इसमें कोई सुधार न हो, तो इसको नजरअंदाज करने की गलती नहीं करना चाहिए। कई मामलों में अंडकोष के आसपास अचानक से तरल पदार्थ एकत्र हो सकता है, जिस कारण सूजन आ सकती है।
अधिकतर मामलों में कैंसर की गांठ दर्दरहित होती है। लेकिन कुछ मामलों में स्क्रोटम में दर्द या जलन जैसी समस्या महसूस हो सकती है। ऐसे में इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि अगर दो सप्ताह से ज्यादा दर्द बना रहे, तो आप हेल्थ एक्सपर्ट को इसकी जानकारी जरूर दें।
स्क्रोटम में तरल पदार्थ का जमा होना भी टेस्टिकुलर कैंसर के वार्निंग साइन में शामिल हो सकता है। स्क्रोटम में तरल पदार्थ की वजह से सूजन की समस्या शुरू हो सकती है।
इस कैंसर से पीड़ित व्यक्ति को लोअर बैक में दर्द महसूस हो सकता है। हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक कई बार पीठ दर्द, बिना किसी वजह के थकान, वजन कम होना या सांस लेने में तकलीफ आदि होना टेस्टिकुलर कैंसर के लक्षण हो सकते हैं। खासकर जब अंडकोष से बाहर बीमारी फैल गई हो।
एक रिपोर्ट के मुताबिक टेस्टिकुलर ट्यूमर एक ऐसा हॉर्मोन सीक्रेट कर सकता है, जिसकी वजह से मेल ब्रेस्ट में पेन, सूजन या फिर ब्रेस्ट सॉफ्ट महसूस हो।
15 से 40 साल के पुरुषों में इसका जोखिम अधिक होता है।
पिता या भाई को पहले टेस्टिकुलर कैंसर हुआ हो।
फैमिली में किसी को पहले यह कैंसर हुआ हो।
टेस्टिकुलर एब्नॉर्मल्टिज या फिर इनफर्टिलिटी की समस्या होने पर।
लाइफस्टाइल या एन्वॉयरमेंट की वजह से भी टेस्टिकुलर कैंसर का जोखिम बना रहता है।
अगर व्यक्ति को पहले कभी टेस्टिकुलर कैंसर हुआ हो।