By अंकित सिंह | Jan 10, 2026
रोहिणी आचार्य ने किसी का नाम लिए बिना अपने भाई और राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के नेता तेजस्वी यादव पर तीखा हमला किया है। सोशल मीडिया पर एक कड़े शब्दों वाले पोस्ट में उन्होंने लिखा कि किसी "महान विरासत" को नष्ट करने के लिए बाहरी लोगों की ज़रूरत नहीं है, अपने ही लोग काफी हैं। उनके शब्दों से संकेत मिलता है कि अहंकार और गलत सलाह परिवार के कुछ सदस्यों को उस पहचान को मिटाने के लिए प्रेरित कर रही है जिसने उन्हें पहचान दिलाई।
रोहिणी आचार्य ने एक्स पर लिखा कि बड़ी शिद्दत से बनायी और खड़ी की गयी "बड़ी विरासत" को तहस - नहस करने के लिए परायों की जरूरत नहीं होती, अपने और अपनों के चंद षड्यंत्रकारी "नए बने अपने" ही काफी होते हैं। हैरानी तो तब होती है , जब "जिसकी" वजह से पहचान होती है , जिसकी वजह से वजूद होता है , उस पहचान, उस वजूद के निशान को बहकावे में आ कर मिटाने और हटाने पर "अपने" ही आमादा हो जाते हैं।
आचार्य ने कहा कि जब विवेक पर पर्दा पड़ जाता है, अहंकार सिर पर चढ़ जाता है। तब "विनाशक" ही आँख - नाक और कान बन बुद्धि - विवेक हर लेता है। आरजेडी को चुनावी क्षेत्र में मिली करारी हार के बाद यह विवाद सामने आया है। बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए ने भारी बहुमत से जीत हासिल की, जबकि आरजेडी 140 से अधिक सीटों में से केवल 25 सीटें ही जीत पाई। भाजपा और जेडीयू को क्रमशः 89 और 85 सीटें मिलीं, वहीं एनडीए गठबंधन ने 243 सदस्यीय विधानसभा में 200 सीटों का आंकड़ा पार कर लिया।
आरजेडी के सहयोगी दलों को भी भारी नुकसान हुआ, कांग्रेस को सिर्फ छह सीटें मिलीं और वामपंथी दलों का प्रदर्शन न के बराबर रहा। प्रशांत किशोर के नेतृत्व वाली नवगठित जनसूरज पार्टी अपना खाता भी नहीं खोल पाई। आरजेडी की इस करारी हार के एक दिन बाद रोहिणी ने राजनीति छोड़ने और अपने परिवार से संबंध तोड़ने की घोषणा की। एक भावुक पोस्ट में रोहिणी ने आरोप लगाया कि पार्टी के खराब प्रदर्शन पर नेतृत्व से सवाल उठाने के बाद उनके भाई तेजस्वी यादव और उनके करीबी सहयोगी आरजेडी सांसद संजय यादव ने उन्हें गाली दी, अपमानित किया और उन पर हमला भी किया।