बिहार विधानसभा में RJD ने साधा संघ प्रमुख पर निशाना, बीजेपी ने किया पलटवार

By अंकित सिंह | Mar 09, 2022

पटना। मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया गया। महिला दिवस के अवसर पर बिहार विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार सिन्हा ने सम्मान के प्रतीक के रूप में कृषि विभाग के बजट के दौरान वरिष्ठ विधायक ज्योति देवी को सदन के संचालन के लिए नामित किया। ज्योति देवी जब आसन पर बैठी थीं तब सभी महिला विधायकों ने रोस्टर के अनुसार अपनी-अपनी बातें रखी। हालांकि इसी दौरान कुछ ऐसा हुआ कि विधानसभा में शोरगुल शुरू हो गया। दरअसल, राजद की एक विधायक ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत के बारे में टिप्पणी कर दी। विधायक की इस टिप्पणी पर भाजपा में आक्रोश व्याप्त हो गया। भाजपा की ओर से इस पर विरोध दर्ज कराया गया।

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राजद की वरिष्ठ विधायक और राज्य की पूर्व मंत्री अनीता देवी ने केंद्र और राज्य में राजग सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार सहित देश में किसान बढ़ती उत्पादन लागत के बीच कम आमदनी के कारण पीड़ित हैं। अनीता देवी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के किसानों की आय को दोगुना करने के वादे को याद करते हुए आरोप लगाया कि यह डेढ़ गुना भी नहीं बढ़ा है। इस पर भाजपा विधायकों ने आपत्ति की। वहीं, अनीता देवी द्वारा महिलाओं के बारे में भागवत के विचारों संबंधी मीडिया की खबरों का हवाला दिए जाने पर भाजपा नेता जबरदस्त हंगामा करने लगे। उपमुख्यमंत्री रेणु देवी सहित भाजपा की अन्य महिला विधायकों के भी विरोध जताया। रेणु देवी ने कहा कि राजद विधायक आरएसएस के बारे में जानकारी नहीं होने के कारण ऐसा बोल रही हैं। उन्होंने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा, ‘‘एक राजनेता के रूप में मेरा खुद का उत्थान उस उच्च सम्मान का प्रमाण है जिसमें आरएसएस महिलाओं को रखता है। स्वतंत्रता संग्राम के दिनों से ही महिलाएं संघ से जुड़ी हुई हैं।’’ 

मामला बढ़ा तो तेजस्वी यादव बीच बचाव में आए। उन्होंने हस्तक्षेप करते हुए अपनी मां और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के खिलाफ की गई टिप्पणियों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि बिहार की पहली महिला मुख्यमंत्री के रूप में प्रशासनिक और राजनीतिक जिम्मेदारियों का राबड़ी देवी निर्वहन किया था। बाद में तेजस्वी यादव ने अपना फोन निकाला और मोहन भागवत के बारे में एक प्रमुख समाचार वेबसाइट द्वारा प्रकाशित एक रिपोर्ट को पढ़ना शुरू किया, जिसके बाद सदन में नए सिरे से शोरगुल शुरू हो गया। वहीं, भाजपा विधायक संजय सरावगी ने कहा कि जो व्यक्ति सदन में मौजूद ही नहीं है उसके बारे में कैसे टिप्पणी की जा सकती है और इसे सदन की कार्यवाही से हटाया जाना चाहिए। इस पर, यादव ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि क्या यह तानाशाही है। उन्होंने कहा, जब उपमुख्यमंत्री आरएसएस और भागवत की प्रशंसा करेंगी तो उसे कार्यवाही का हिस्सा बनने दिया जाएगा। लेकिन जब हम किसी मीडिया रिपोर्ट से उद्धरण देते हैं तो उसे हटा दिया जाएगा। यह किस तरह का नियम है। 

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