By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Aug 26, 2026
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा)-शरदचंद्र पवार (शप) के विधायक रोहित पवार ने बुधवार को आरोप लगाया कि महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (एमपीएससी) द्वारा मार्च में आयोजित औषधि निरीक्षक ग्रुप-बी भर्ती परीक्षा का प्रश्नपत्र उम्मीदवारों को 40-40 लाख रुपये में बेचा गया था। उन्होंने मामले की जांच की मांग की। सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एक नेता ने कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मामले की गहन जांच कराने और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
रोहित ने कहा कि जांच में अब यह सामने आ चुका है कि प्रश्नपत्र लीक हुआ था लेकिन आयोग के इस स्पष्टीकरण पर सवाल उठाया कि प्रश्नपत्र केवल एक छात्र के पास उपलब्ध था। उन्होंने प्रश्नपत्र लीक होने को आयोग की विश्वसनीयता से जुड़ा गंभीर मामला बताते हुए आयोग के अध्यक्ष से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए तत्काल इस्तीफा देने की मांग की। राकांपा-शप के विधायक ने सरकार से आयोग के अध्यक्ष पद पर किसी साफ छवि वाले व्यक्ति की नियुक्ति करने का भी आग्रह किया।
भाजपा विधायक अभिमन्यु पवार ने कहा कि उन्होंने आयोग की औषधि निरीक्षक 2025 परीक्षा के कथित प्रश्नपत्र लीक होने के मामले में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि मुख्यमंत्री ने मामले को गंभीरता से लिया है और आश्वासन दिया है कि इसकी गहन जांच कराई जाएगी तथा जिम्मेदार लोगों के खिलाफ जल्द से जल्द कड़ी कार्रवाई की जाएगी। भाजपा नेता ने कहा कि आयोग जैसे महत्वपूर्ण संस्थान द्वारा आयोजित परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक होना गंभीर मामला है।
उन्होंने प्रश्नपत्र कैसे लीक हुआ, आयोग से किस स्तर पर बाहर निकला और इसके तैयार करने, छपाई, परिवहन तथा परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाने के दौरान कहीं कोई लापरवाही या अनियमितता तो नहीं हुई, इसकी जांच की मांग की। अभिमन्यु पवार ने इस बात की जांच करने को कहा कि प्रश्नपत्र संबंधित उम्मीदवार तक कैसे पहुंचा और कितने अन्य उम्मीदवारों को भी यह प्रश्नपत्र मिला। भाजपा नेता ने कहा कि जांच के निष्कर्ष छात्रों के सामने रखे जाने चाहिए और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।
रोहित पवार ने परीक्षा रद्द किए जाने के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि प्रश्नपत्र लीक का मुद्दा उन्होंने सबूतों के साथ उठाया था और इस मामले को जांच एजेंसियों के समक्ष भी आगे बढ़ाया था। उन्होंने आयोग से मामले को दबाने की कोशिश करने के बजाय जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की।