By अंकित सिंह | Oct 10, 2024
आम आदमी पार्टी (आप) सरकार बनाम दिल्ली के उपराज्यपाल (एलजी) के बीच गतिरोध गुरुवार को मुख्यमंत्री आतिशी के 'घर' तक पहुंच गया, जब उन्हें सिविल लाइंस बंगला खाली करने के लिए कहा गया। आतिशी ने दो दिन पहले ही अपना कुछ सामान सिविल लाइंस के 6, फ्लैगस्टाफ रोड पर शिफ्ट किया था। पीडब्ल्यूडी ने बुधवार को बंगले पर कब्जा कर लिया, जिससे विवाद खड़ा हो गया। गुरुवार को AAP ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के 'इशारे' पर एलजी वीके सक्सेना ने उन्हें दिल्ली सीएम के आधिकारिक आवास से 'बाहर निकाल दिया।
पार्टी ने कहा कि आम आदमी पार्टी की सरकार तमाम बाधाओं और मुश्किलों से लड़ते हुए अंतिम सांस तक दिल्ली की जनता की सेवा करती रहेगी और उनके हक़ और अधिकार की लड़ाई लड़ती रहेगी। पूरा मामला क्या है कि हम आपको बताते हैं। दरअसल, मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद अरविंद केजरीवाल ने यह आवास खाली कर दिया था। केजरीवाल ने मुख्यमंत्री आवास 4 अक्टूबर को खाली किया था। आतिशी इस आवास में 7 अक्टूबर को शिफ्ट हुई थीं। लेकिन 8 अक्टूबर को दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता ने बड़ा आरोप लगा दिया। उन्होंने दावा किया कि लोक निर्माण विभाग द्वारा 6 अक्टूबर को मुख्यमंत्री कार्यालय के विशेष सचिव को पत्र लिखकर चाबी सौंपने का अनुरोध किया गया है।
उन्होंने साफ तौर पर कहा कि इसका मतलब है कि केजरीवाल ने अपना आवास खाली किया ही नहीं था। इसके बाद 9 अक्टूबर का दिन आता है। आतिशी के समान को घर से बाहर निकाल कर इसे पूरी तरीके से सील कर दिया जाता है। ऐसे में सवाल यह है कि क्यों मुख्यमंत्री आतिशी का सामान बाहर करके आवास को सील किया गया? दरअसल, आरोप है कि इस बंगले को विधिवत तरीके से पीडब्ल्यूडी डिपार्टमेंट को हैंडोवर नहीं किया गया। इतना ही नहीं, उससे पहले ही मुख्यमंत्री आतिशी का सामान इस बंगले में पहुंचा दिया गया।
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