RSS पर महिला विरोधी होने का आरोप लगाने वाले राहुल संघ को जानते ही नहीं हैं

By विजय कुमार | Aug 09, 2018

जब से राहुल गांधी कांग्रेस के अध्यक्ष बने हैं, तब से वह कुछ अधिक ही बोलने लगे हैं; पर इससे उनका अज्ञान भी लगातार प्रकट हो रहा है। वह कई बार कह चुके हैं कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ महिला विरोधी है। गत सात अगस्त 2018 को दिल्ली में कांग्रेस के महिला सम्मेलन में उन्होंने फिर यही बात दोहरायी। 

जैसे कबड्डी को ही लें। इसमें खिलाड़ी आपस में गुत्थमगुत्था हो जाते हैं। अतः इसे युवक और युवतियां एक साथ नहीं खेल सकते। ऐसा ही अन्य कार्यक्रमों के साथ है। इसलिए संघ की शाखा पूरी तरह पुरुष वर्ग की होती है और समिति की शाखा महिला वर्ग की। साल में एक-दो कार्यक्रम सामूहिक भी होते हैं; पर व्यावहारिक कठिनाई के कारण दोनों की दैनिक गतिविधि, शाखा, शिविर आदि अलग हैं।

आइए, राष्ट्र सेविका समिति के बारे में कुछ जानें। शाखा में जाने से स्वयंसेवक के विचार और व्यवहार में भारी परिवर्तन होता है। ऐसा ही अनुभव हुआ वर्धा निवासी श्रीमती लक्ष्मीबाई केलकर को, जब उनके बेटे शाखा जाने लगे। इससे उनके मन में यह भावना पैदा हुई कि ऐसा ही संगठन महिलाओं और लड़कियों के लिए भी होना चाहिए। 

कुछ दिन बाद जब संघ के संस्थापक डा. हेडगेवार वर्धा आये, तो श्रीमती केलकर ने उनसे भेंट की। डॉ. जी ने उनके विचारों का स्वागत करते हुए उन्हें महिला वर्ग के लिए अलग संगठन बनाने को कहा। डॉ. जी ने कहा कि ये दोनों संगठन रेल की पटरियों की तरह साथ-साथ और एक दूसरे के पूरक बन कर तो चलेंगे; पर आपस में मिलेंगे नहीं। 

इस प्रकार विजयादशमी (25 अक्तूबर, 1936) को वर्धा में ‘राष्ट्र सेविका समिति’ की स्थापना हुई। इसकी कार्यशैली संघ जैसी ही है। समिति में भी गुरु का स्थान व्यक्ति बजाय ‘परम पवित्र भगवा ध्वज’ को दिया गया है। इसकी शाखा तथा शिविरों में नारियों को शारीरिक और मानसिक रूप से सबल और समर्थ बनाने वाले कार्यक्रमों का प्रशिक्षण दिया जाता है।

श्रीमती केलकर (वंदनीय मौसी जी) अति सामाजिक, धार्मिक और साहसी महिला थीं। 1947 में देश विभाजन से कुछ समय पूर्व तक उन्होंने कराची तथा सिंध में प्रवास किया था। समिति जीजाबाई के मातृत्व, रानी लक्ष्मीबाई के नेतृत्व और देवी अहिल्याबाई होल्कर की कर्तव्यपरायणता को नारियों के लिए आदर्श मानती है। इसके साथ ही सेविकाएं दुष्टों को मारने और सज्जनों को अभयदान देने वाली देवी पार्वती के अष्टभुजा रूप की भी वंदना करती हैं। 

समिति पांच उत्सव (वर्ष प्रतिपदा, गुरु पूर्णिमा, रक्षाबंधन, विजयादशमी तथा मकर संक्रांति) अपनी शाखाओं में मनाती हैं। इसके अलावा देश, धर्म और समाज के उत्थान में योगदान देने वाली महान महिलाओं की जयंती तथा पुण्यतिथियां भी मनायी जाती हैं। हर चार-पांच साल बाद राष्ट्रीय सम्मेलन होते हैं।

हिन्दू संस्थाओं द्वारा समय-समय पर चलाये गये गोरक्षा, कश्मीर बचाओ, असम समस्या, धर्मान्तरण का विरोध, स्वदेशी का प्रचलन, श्रीराम जन्मभूमि जैसे राष्ट्रीय अभियानों में भी सेविकाएं सक्रिय रहती हैं। समिति ने कई देशव्यापी कार्यक्रम किये हैं। इनमें वंदे मातरम् स्मृति शताब्दी, डॉ. अम्बेडकर जन्मशती, रानी लक्ष्मीबाई का 125वां बलिदान दिवस, भगिनी निवेदिता का 125वां जन्मदिवस, देवी अहिल्या द्विशताब्दी, रानी मां गाइडिन्ल्यू जन्मशती आदि प्रमुख हैं। 

देश की रक्षा के लिए सीमा पर तैनात सैनिकों को राखी भेजने की शुरुआत समिति ने ही की थी। अब इसे अनेक अन्य संस्थाओं ने भी अपना लिया है। समिति चित्र प्रदर्शिनी, संस्कार केन्द्र, नाटक, कथा, विद्यालय, चिकित्सालय, छात्रावास, पुस्तकालय, वाचनालय, भजन मंडली, योगासन केन्द्र, पुरोहित प्रशिक्षण, साहित्य प्रकाशन आदि से समाज की सेवा कर रही है। समिति द्वारा हिन्दू संवत्सर के अनुसार छपने वाली ‘वार्षिक दिनदर्शिका’ देश ही नहीं, तो विदेश में भी बहुत लोकप्रिय है। 

समिति की अनेक सेविकाएं शिक्षा, नौकरी या कारोबार के लिए विदेश जाती रहती हैं। हजारों सेविकाएं विवाह के बाद वहीं बस गयी हैं। वे वहीं समिति का काम करती हैं। विदेशों में संघ की अधिकांश शाखाएं साप्ताहिक हैं। उनमें स्वयंसेवक सपरिवार आते हैं। इससे भी वहां समिति का काम बढ़ रहा है। विदेश में बसे स्वयंसेवक एवं उनके परिजनों के लिए प्रायः हर पांच साल बाद भारत में एक सप्ताह का शिविर होता है। इसमें समिति की सेविकाएं भी आती हैं। 

-विजय कुमार

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