बटेंगे तो कटेंगे के नारे के साथ RSS ने संभाली महाराष्ट्र में कमान! हिंदू वोटों को लामबंद करने की कोशिश

By अंकित सिंह | Nov 09, 2024

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव भाजपा के लिए कहीं ना कहीं प्रतिष्ठा का सवाल बन चुका है। यही कारण है कि भाजपा अपने महायुति गठबंधन के साथियों के साथ-साथ इस चुनाव में पूरी ताकत लगा रही है। भाजपा के लिए बड़ी बात यह भी है कि उसके पक्ष में महाराष्ट्र में आरएसएस भी वोटो को एकजुट करने की कोशिश में जुटा हुआ है। आरएसएस बीजेपी की मदद में सामने आया है। 2024 के लोकसभा चुनाव में महाराष्ट्र में भाजपा कुछ खास सफलता नहीं मिल पाई थी। पार्टी का प्रदर्शन बेकार रहा था। उससे सबक लेते हुए पार्टी ने इस बार सबको साथ लेने की कोशिश की है। यही कारण है कि उसे आरएसएस का भी सहयोग मिल रहा है। 

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जानकारी के मुताबिक के महाराष्ट्र में आरएसएस के 65 से अधिक मित्र संगठन बीजेपी की मदद कर रहे हैं। यह संगठन सजग रहो नामक एक अभियान भी चला रहे हैं। इसका उद्देश्य पूरी तरीके से भाजपा की मदद करना और हिंदू वोटो को लामबंत करना है। आरएसएस के कार्यकर्ता लोगों के घर तक पहुंच रहे हैं। उन्हें भारी संख्या में मतदान के लिए प्रेरित कर रहे हैं। उनके घर चाय भी पी रहे हैं और साथ ही साथ बटेंगे तो कटेंगे नारे का याद भी दिला रहे हैं। इन कार्यकर्ताओं द्वारा हिंदी और मराठी में वितरित किया जा रहा एक पेज का पैम्फलेट लोगों को आरएसएस द्वारा समर्थित मंत्र की याद दिलाता है और अप्रैल-जून के आम चुनाव परिणामों से सबक लेता है। 48 लोकसभा सीटों वाले राज्य में चुनाव में भाजपा सिर्फ नौ सीटों पर सिमट गई।

पैम्फलेट में लोगों से उन लोगों से सावधान रहने के लिए कहा गया है जो संविधान, आरक्षण और एससी और एसटी के बारे में अफवाहें फैला रहे हैं और एक ऐसी सरकार चुनने को कहा जा रहा है कि जो भूमि जिहाद, लव जिहाद, धार्मिक रूपांतरण, चोरी-डकैती और दंगे पर रोक लगाएगी। बिना किसी का नाम लिए, क्रमशः नरेंद्र मोदी और राहुल गांधी के स्पष्ट संदर्भ में पैम्फलेट में यह भी कहा गया है कि लोगों को विश्व मंच पर भारत की छवि सुधारने के लिए काम करने वाले और विदेशों में देश को बदनाम करने वाले के बीच अंतर का एहसास होना चाहिए। 

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नागपुर में आरएसएस के रेशिमबाग कार्यालय में, जहां प्रतिदिन एक बड़ी शाखा आयोजित की जाती है, स्थानीय संघ कार्यकर्ताओं के कदमों में भी तेजी आती दिख रही है। महाराष्ट्र एक ऐसा राज्य है जिसके बारे में आरएसएस सबसे अच्छी तरह से जानता है और इसकी जड़ें सबसे ज्यादा मजबूत हैं - इसका मुख्यालय नागपुर में है। आरएसएस का राज्य के शीर्ष भाजपा नेताओं-देवेंद्र फड़नवीस और नितिन गडकरी के साथ भी घनिष्ठ संबंध है। दरअसल, फड़णवीस ने हाल ही में कहा था कि उन्होंने लोकसभा नतीजों के बाद "अराजकतावादियों और वोट जिहादियों से लड़ने में मदद" के लिए आरएसएस से संपर्क किया था।  

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