By Ankit Jaiswal | Jul 21, 2026
वैश्विक बाजार में जारी उतार-चढ़ाव के बीच मंगलवार को भारतीय रुपये ने मजबूती के साथ कारोबार का समापन किया। शुरुआती कारोबार में दबाव के बावजूद दिन के अंत तक रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 12 पैसे मजबूत होकर 96.24 के स्तर पर बंद हुआ। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय रिजर्व बैंक की विदेशी मुद्रा तरलता बढ़ाने वाली पहलों और देश में बढ़े विदेशी मुद्रा प्रवाह ने रुपये को मजबूती देने में अहम भूमिका निभाई है।
भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक कुल विदेशी मुद्रा प्रवाह में सबसे बड़ा योगदान विदेशी मुद्रा अनिवासी जमा खातों का रहा। इस माध्यम से 17.406 अरब अमेरिकी डॉलर प्राप्त हुए। वहीं विदेशी मुद्रा में लिए गए विदेशी ऋण से 1.97 अरब अमेरिकी डॉलर आए, जबकि बाहरी वाणिज्यिक ऋण के माध्यम से 1.342 अरब अमेरिकी डॉलर का प्रवाह दर्ज किया गया।
गौरतलब है कि विदेशी मुद्रा का मजबूत प्रवाह किसी भी देश की मुद्रा को स्थिर रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इससे आयात भुगतान, विदेशी व्यापार और भुगतान संतुलन को मजबूती मिलती है। यही वजह है कि बाजार ने इन आंकड़ों को सकारात्मक संकेत के रूप में देखा और रुपये को समर्थन मिला।
हालांकि दूसरी ओर कुछ ऐसे कारण भी हैं जो रुपये पर दबाव बनाए हुए हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर सूचकांक 100.91 के आसपास बना हुआ है। यह सूचकांक दुनिया की प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को दर्शाता है। इसके अलावा ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत भी बढ़कर लगभग 89.44 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है।
मौजूद जानकारी के अनुसार पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के साथ-साथ यमन के हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के बीच बढ़े टकराव ने वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। यदि इस क्षेत्र से तेल आपूर्ति प्रभावित होती है तो कच्चे तेल की कीमतों में और तेजी आ सकती है, जिसका असर भारत जैसे बड़े आयातक देशों पर भी पड़ सकता है।
घरेलू शेयर बाजार में मंगलवार को कमजोरी का माहौल देखने को मिला। बंबई शेयर बाजार का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 238.41 अंक की गिरावट के साथ 77,470.11 पर बंद हुआ। वहीं राष्ट्रीय शेयर बाजार का निफ्टी 50.80 अंक फिसलकर 24,187.70 के स्तर पर पहुंच गया।
विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भी सोमवार को भारतीय शेयर बाजार से शुद्ध रूप से 1,121.04 करोड़ रुपये की बिकवाली की। आमतौर पर विदेशी निवेशकों की निकासी से रुपये पर दबाव बढ़ता है, लेकिन इस बार भारतीय रिजर्व बैंक की विदेशी मुद्रा तरलता संबंधी पहल और मजबूत विदेशी मुद्रा प्रवाह ने उस असर को काफी हद तक संतुलित कर दिया। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में वैश्विक घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेश के रुख के आधार पर रुपये की चाल तय होगी, जबकि फिलहाल भारतीय मुद्रा को घरेलू स्तर पर पर्याप्त समर्थन मिलता हुआ दिखाई दे रहा हैं।