By अभिनय आकाश | Mar 19, 2026
ईरान और अमेरिका इजराइल में के बीच छिड़े युद्ध के बाद तेल के संकट पूरी दुनिया को अपने गिरफ्त में ले चुका है। इस बीच भारत का दम दुनिया भर में दिख रहा है। बीते दिनों हॉर्मोज स्ट्रेट से भारत के दो जहाज सही सलामत गुजरात के बंदरगाह पहुंचे थे। अब भारत ने एक और दांव चल दिया है। दरअसल दक्षिण चीन सागर में एक रूसी तेल का लदा टैंक अचानक भारत की तरफ मुड़ने से दुनिया में हड़कंप मच गया है। चीन की रिजाऊ बंदरगाह की ओर बढ़ रहे टैंकर अब तेजी से भारत की ओर आ रहे हैं। जिस तरह से तेल और गैस को लेकर पूरी दुनिया में हाहाकार मचा हुआ है। ऐसे में भारत ने अपना ट्रंप कार्ड चल दिया है और भारत ने मौजूदा स्थिति में रूस से तेल आयात बढ़ाने का फैसला किया है। यह बदलाव ईरान में चल रही जंग के कारण मध्य पूर्व से तेल सप्लाई रुकने के बाद भारत की जरूरतों को पूरा करने के लिए हुआ है। एक्वाटाइटन नाम का यह आफरा मैक्स टैंकर बाल्टिक सागर के एक बंदरगाह से जनवरी के अंत में उालस क्रूड ऑयल लोड करके निकला था। शुरू में इसका डेस्टिनेशन चीन का रिजाऊ पोर्ट था। लेकिन मार्च के मध्य में दक्षिण चीन पूर्व एशियाई पानी में पहुंचते ही इसने यूटर्न ले लिया। अब यह 21 मार्च को न्यू मंगलौर बंदरगाह पहुंचने वाला है और इस से पूरी दुनिया में तहलका मच गया। शिप ट्रैकिंग डाटा के मुताबिक भारत हमेशा से रूस से तेल खरीदता रहा है।
ईरान वाले संकट की वजह से अमेरिका ने मार्च 26 में 30 दिनों की टेंपरेरी छूट दे दी ताकि दुनिया में तेल की कमी ना हो। रूस का जो एक आंकड़ा है हमारे पास जो मीडिया रिपोर्ट्स के अलग-अलग आधिकारिक आंकड़े हैं वो कहते हैं कि कुल लगभग 3.3 से 4.2 मिलियन बैरल प्रतिदिन रशिया क्रूड ऑयल बेच रहा है। इसमें सबसे बड़ा हिस्सेदार चीन मालूम पड़ रहा है जो सबसे ज्यादा 48 से 52% लगभग 2 मिलियन बैरल दिन या उससे ज्यादा रिकॉर्ड स्तर पर खरीद रहा है। भारत दूसरा बड़ा है देश जो 37% तक फरवरी में 1 मिलियन बैरल प्रतिदिन के आसपास भारत खरीद रहा था। मार्च में ये 1 1/2 मिलियन मिलियन बैरल हो गया है। तुर्की भी 6 से 11% तक खरीद रहा है। बाकी थोड़ा बहुत जो है वो ईयू पाइपलाइन से साउथ कोरिया जैसे देशों तक जा रहा है। भारत और चीन मिलाकर ही रूस से 80% तेल खरीद ले रहे हैं। पहले रूसी तेल जो है वो सस्ता था। जो ब्रेंट क्रूड था उससे 10 13 डॉलर कम था। लेकिन अब संकट की वजह से डिस्काउंट बहुत कम कर दिया गया है और लगभग यह भी $ डॉलर प्रति बैरल बिक रहा है। भारत रूस का तेल खरीद का अगर हिसाब-किताब समझे तो फरवरी 2026 में लगभग 1 मिलियन से 1.04 मिलियन बैरल प्रतिदिन भारत ने खरीदा। बीते सालों से कम है आंकड़ा। मार्च में पहले 11-12 दिन में ये बढ़कर 1 मिलियन तक चला गया है। वजह है हारमूज के बंद होने से सऊदी इराक यूएई से तेल कम आ रहे हैं। अमेरिका की छूट मिली है तो भारत ने तुरंत 30 मिलियन मिलियन बैरल रूसी तेल खरीद लिया। आईओcएल और Reliance को लेकर जानकारी है कि वो लोग खरीद रहे हैं। कुल भारत जो है रोजाना 4 1/2 से 5.3 मिलियन बैरल तेल जो है इंपोर्ट करता है। जिससे रूस अब फिर से बड़ा सप्लायर बना हुआ है। लंबे समय में भारत दूसरे देशों मिडिल ईस्ट अमेरिका से ज्यादा तेल लेने की कोशिश कर रहा है। लेकिन अमेरिका के साथ ट्रेड डील के लिए रूसी तेल कम करना पड़ सकता है।
अब इधर रूस जो है संकट का फायदा उठाकर चीन और भारत को ज्यादा तेल बेच पा रहा है। अच्छा पैसा कमा रहा है। पाकिस्तान को ऑफर दे रहा है लेकिन पाकिस्तान चुप्पी साधे। भारत ने मार्च में रूस से तेल खरीद बढ़ा दी क्योंकि लगातार कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। खबर कुछ ऐसी भी है कि कई सारे ऐसे टैंकर हैं तकरीबन पांच से सात ऐसे टैंकर्स हैं जो चाइना की तरफ या साउथ चाइना सी के इलाके में थे और वो अचानक मुड़ गए हैं। यू टर्न कर रहे हैं और भारत की तरफ आ रहे हैं। हालांकि भारत ने आधिकारिक रूप से इस तरह का कोई भी आंकड़ा पेश नहीं किया है। भारत ने कुछ भी इस पर आधिकारिक रूप से नहीं कहा है। लेकिन रशिया यकीनन एक तेल जो है वह बेच रहा है। हालांकि जबजब रशिया पाकिस्तान को कोई ऑफर देता है तो भारत के कान खड़े हो जाते हैं। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री हो गए या पाकिस्तान के आर्मी चीफ हो गए, पाकिस्तान की जो सियासत है या पाकिस्तान की सेना है वो भी जब भी रशिया से अपना कोऑर्डिनेशन बढ़ाना चाहती है चाइना के जरिए तो भारत के कान खड़े हो जाते हैं।