Russia पर संकट आया तो दोस्त India ने तुरंत मदद का हाथ बढ़ाया, तेल संकट से जूझते Putin की मदद के लिए Modi ने भेजा हजारों टन Petrol

By नीरज कुमार दुबे | Jul 02, 2026

रूस और यूक्रेन युद्ध के बीच अब सबसे बड़ा असर रूस की ऊर्जा व्यवस्था पर दिखाई देने लगा है। यूक्रेन के लगातार ड्रोन हमलों ने रूस की कई तेल रिफाइनरियों और ऊर्जा ढांचे को गंभीर नुकसान पहुंचाया है। इसका परिणाम यह हुआ कि रूस के अनेक क्षेत्रों में पेट्रोल की कमी, लंबी कतारें और ईंधन वितरण पर नियंत्रण जैसी स्थितियां सामने आने लगी हैं। यही वह समय है जब भारत ने एक भरोसेमंद मित्र और रणनीतिक साझेदार की भूमिका निभाते हुए रूस को तुरंत पेट्रोल की आपूर्ति शुरू कर दी है।

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हम आपको बता दें कि यूक्रेन के हमलों ने रूस की लगभग एक तिहाई रिफाइनिंग क्षमता को प्रभावित किया है। कई रिफाइनरियों में आग लगी, उत्पादन ठप हुआ और ईंधन आपूर्ति बाधित हुई। जून महीने में रूस का पेट्रोल उत्पादन सत्रह प्रतिशत तक गिर गया। रूस में गर्मियों के दौरान पेट्रोल और डीजल की मांग तेजी से बढ़ जाती है, खासकर कृषि क्षेत्र में। ऐसे समय में ईंधन संकट ने प्रशासन की चुनौती और बढ़ा दी है।

रूस के कई क्षेत्रों में पेट्रोल पंपों पर लंबी लाइनें देखी जा रही हैं। कई जगहों पर पेट्रोल की बिक्री सीमित कर दी गई है। सोशल मीडिया पर आम लोग अपने अनुभव साझा कर रहे हैं और बढ़ती कीमतों को लेकर चिंता जता रहे हैं। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी स्वीकार किया कि यूक्रेनी हमलों के कारण कुछ क्षेत्रों में समस्याएं पैदा हुई हैं, हालांकि उन्होंने भरोसा दिलाया कि स्थिति को नियंत्रित किया जा रहा है।

इस पूरे घटनाक्रम में भारत की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण बन गई है। जून महीने में भारत ने रूस से रिकॉर्ड स्तर पर कच्चा तेल खरीदा। आंकड़ों के अनुसार भारत ने प्रतिदिन लगभग सत्ताइस लाख बैरल रूसी तेल आयात किया। भारत के कुल तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी पचास प्रतिशत से अधिक पहुंच गई। अब भारत उसी तेल को रिफाइन करके रूस को पेट्रोल के रूप में भेज रहा है। यह भारत की ऊर्जा क्षमता, रिफाइनिंग ताकत और रणनीतिक संतुलन का स्पष्ट उदाहरण है।

इसका सामरिक महत्व और भी बड़ा है। पश्चिमी प्रतिबंधों और युद्ध के दबाव के बीच भारत ने अपनी स्वतंत्र विदेश नीति को बनाए रखा है। भारत ने साफ कर दिया है कि वह अपने राष्ट्रीय हितों के अनुसार फैसले लेगा और अपने मित्र देशों के साथ संतुलित संबंध बनाए रखेगा। यही कारण है कि आज रूस और भारत की साझेदारी केवल तेल व्यापार तक सीमित नहीं रह गई, बल्कि यह वैश्विक राजनीति और सुरक्षा व्यवस्था का अहम स्तंभ बनती जा रही है।

रक्षा क्षेत्र में भी इसी साझेदारी की ताकत दिखाई दे रही है। भारत और रूस की संयुक्त कंपनी ब्रह्मोस एयरोस्पेस ने संकेत दिया है कि यदि रूस चाहे तो उसे ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल की आपूर्ति की जा सकती है। यह बयान अंतरराष्ट्रीय रक्षा जगत में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ब्रह्मोस मिसाइल मूल रूप से रूस की ओनिक्स तकनीक पर आधारित थी, लेकिन बीते दो दशकों में भारत ने इसमें जबरदस्त तकनीकी सुधार किए हैं।

आज ब्रह्मोस दुनिया की सबसे घातक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों में गिनी जाती है। इसकी मारक क्षमता चार सौ पचास किलोमीटर से अधिक पहुंच चुकी है, जबकि कुछ संस्करण आठ सौ किलोमीटर तक वार करने में सक्षम बताए जाते हैं। यह मिसाइल जमीन, समुद्र, पनडुब्बी और लड़ाकू विमान हर मंच से दागी जा सकती है। इसकी इलेक्ट्रॉनिक प्रणाली, लक्ष्य भेदन क्षमता और दुश्मन की जैमिंग को निष्क्रिय करने की ताकत इसे बेहद खतरनाक हथियार बनाती है।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अब रूस भी ब्रह्मोस के उन आधुनिक संस्करणों को खरीदने में रुचि दिखा रहा है जिन्हें भारत ने उन्नत बनाया है। यूक्रेन युद्ध के दौरान रूस ने बड़ी संख्या में सटीक हथियारों का इस्तेमाल किया है। ऐसे में अतिरिक्त उत्पादन क्षमता और आधुनिक मिसाइल प्रणाली रूस के लिए रणनीतिक रूप से उपयोगी साबित हो सकती है। साथ ही यह पूरा घटनाक्रम एक नए वैश्विक युग की ओर संकेत करता है। एक तरफ यूक्रेन के हमलों ने यह साबित कर दिया कि आधुनिक युद्ध केवल सीमाओं पर नहीं, बल्कि ऊर्जा ढांचे और आर्थिक क्षमता पर भी लड़े जाते हैं। दूसरी तरफ भारत ने दिखाया है कि मजबूत अर्थव्यवस्था, उन्नत रक्षा तकनीक और संतुलित कूटनीति किसी भी देश को वैश्विक शक्ति केंद्र बना सकती है।

बहरहाल, मोदी दोस्तों का साथ देने के लिए जाने जाते हैं और जैसे ही रूस पर संकट गहराया, भारत तुरंत उसके साथ मजबूती से खड़ा दिखाई दिया। यह उस भरोसे का प्रमाण है जिसने भारत और रूस की मित्रता को दशकों तक मजबूत बनाए रखा है। एक तरफ पश्चिमी दबाव और वैश्विक प्रतिबंधों का माहौल था, दूसरी तरफ भारत ने साफ संदेश दिया कि वह अपने विश्वसनीय साझेदारों को मुश्किल समय में अकेला नहीं छोड़ेगा। चाहे रूस से रिकॉर्ड स्तर पर तेल खरीदना हो, पेट्रोल आपूर्ति के जरिये ऊर्जा संकट कम करने में मदद करनी हो या रक्षा सहयोग को नई ऊंचाई देना हो, भारत ने हर मोर्चे पर अपनी भूमिका निभाई है। यही कारण है कि आज पूरी दुनिया यह देख रही है कि बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच भारत केवल उभरती आर्थिक शक्ति नहीं, बल्कि भरोसेमंद रणनीतिक मित्र के रूप में भी अपनी अलग पहचान बना चुका है।

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