By अभिनय आकाश | Oct 23, 2026
क्या मध्य एशिया में किसी नए और बड़े खतरे का धमाका होने वाला है? दरअसल रिपोर्ट्स के मुताबिक 20 से 27 अक्टूबर के बीच रूस और उज़्बेकिस्तान की सेनाएं तरमेज ट्रेनिंग सेंटर में एक विशाल जॉइंट मिलिट्री डील कर रही हैं। तरमेज अफगानिस्तान की उत्तरी सीमा से महज कुछ ही दूरी पर स्थित सबसे रणनीतिक इलाका है। इस अभ्यास में सिर्फ पैदल सैनिक ही नहीं बल्कि भारी तबाही मचाने वाले लड़ाकू हेलीकॉप्टर जमीन पर गस्त लगाने वाले आधुनिक रोबोटिक वॉरफेयर सिस्टम और दुर्गम पहाड़ियों में चप्पे-चप्पे पर नजर रखने वाले निगरानी ड्रोन तैनात किए गए हैं। यानी रूस और उज़्बेकिस्तान अपनी बॉर्डर सिक्योरिटी को कंक्रीट की दीवार की तरह अभेद बनाने में जुट गए हैं। सवाल उठता है कि आखिर रूस को अफगानिस्तान की सीमा के पास इतना बड़ा सख्ती प्रदर्शन करने की जरूरत क्यों पड़ी? इसके पीछे तीन सबसे बड़े कारण है। पहला आतंकी घुसपैठ का डर। अफगानिस्तान में मौजूद चरमपंथी संगठन और छोटे हथियार बंद गिरोह उज्बेकिस्तान के रास्ते मध्य एशिया में अस्थिरता फैला सकते हैं। दूसरा मध्य एशिया में दबदबा। रूस इस पूरे रीजन का बिग ब्रदर माना जाता है। ताजाकिस्तान में उसका मिलिट्री बेस पहले से ही और उज़्बेकिस्तान के साथ इस झील से पुतिन यह संदेश दे रहे हैं कि मध्य एशिया में रूस का दबदबा कायम रहेगा। तीसरा आधुनिक युद्ध तकनीक का टेस्ट। पथरीले और दुर्गम इलाकों में इंसानी सैनिकों से ज्यादा ड्रोंस और रोबोटिक असरदार होते हैं।