Russia से सीक्रेट मिशन पर निकला S-400, एयर और Sea Route से ऐसे भारत पहुंचेगा चौथा स्क्वाड्रन

By अभिनय आकाश | May 19, 2026

भारत को इस सप्ताह के अंत तक रूस निर्मित एस-400 वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली का चौथा स्क्वाड्रन मिलने वाला है। इस डिलीवरी में एक उच्च स्तरीय समन्वित लॉजिस्टिक्स ऑपरेशन शामिल है, जिसमें समुद्री मार्ग और भारी-भरकम सैन्य परिवहन विमानों का संयोजन किया गया है। भारतीय वायु सेना (आईएएफ) के अधिकारियों द्वारा प्रेषण से पहले किए गए कड़े निरीक्षण के बाद, विशाल घटकों को क्षति और ट्रैकिंग से बचाने के लिए विशेष कंटेनरों में पैक किया जाता है।

पूरे S-400 स्क्वाड्रन के परिवहन के लिए मल्टीमॉडल शिपिंग की आवश्यकता होती है:

समुद्री परिवहन: अत्यधिक भारी-भरकम और विशालकाय मशीनरी जैसे कि मुख्य मिसाइल ट्रांसपोर्टर-इरेक्टर-लॉन्चर (TELs) और तकनीकी सहायता वाहन को रूस में सुरक्षित मालवाहक जहाजों पर लोड किया जाता है। इसके बाद यह भारी खेप भारत के विशेष रणनीतिक बंदरगाहों पर पहुँचती है। 

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हेवी लिफ्ट मिलिट्री एयरक्रॉफ्ट: समय के लिहाज से संवेदनशील और बेहद महत्वपूर्ण घटक जैसे कि कमांड-एंड-कंट्रोल मॉड्यूल (कंट्रोल रूम), सटीक निशाना लगाने वाले एंगेजमेंट राडार और इंटरसेप्टर मिसाइलों की शुरुआती खेप को हवाई मार्ग से भेजा जाता है। इन्हें इल्युशिन Il-76 (Ilyushin Il-76) और बोइंग C-17 ग्लोबमास्टर III (Boeing C-17 Globemaster III) जैसे रणनीतिक भारी-भरकम परिवहन विमानों के जरिए सीधे भारतीय वायुसेना के सुरक्षित ठिकानों (एयरबेस) पर पहुँचाया जाता है।

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