By अभिनय आकाश | Sep 29, 2026
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने आतंकवाद के मुद्दे पर एक स्पष्ट लक्ष्मण रेखा खींची। उन्होंने कहा कि अपने सहयोगियों के साथ नई दिल्ली के द्विपक्षीय संबंध इस बात पर निर्भर करते हैं कि वे भारत के पड़ोसियों से पनपने वाले सीमा-पार आतंकवाद को स्वीकार करते हैं या नहीं। इस बयान को हाल ही में अमेरिका-पाकिस्तान के संबंधों में आई मजबूती और नई दिल्ली-वॉशिंगटन के रिश्तों के संदर्भ में एक अप्रत्यक्ष टिप्पणी के तौर पर देखा जा रहा है। जयशंकर ने मंगलवार को यह बात कही। वे 'एशिया सोसाइटी' द्वारा आयोजित एक विशेष बातचीत कार्यक्रम में भारतीय-अमेरिकी समुदाय और प्रवासी समुदाय के प्रमुख सदस्यों तथा नीति विशेषज्ञों को संबोधित कर रहे थे। यह कार्यक्रम सोमवार को UN जनरल असेंबली के 81वें सत्र के 'हाई-लेवल वीक' के समापन के बाद आयोजित किया गया था। इस चर्चा का संचालन पूर्व अमेरिकी राजनयिक और 'एशिया सोसाइटी पॉलिसी इंस्टीट्यूट' के डिस्टिंग्विश्ड फेलो डैनियल रसेल ने किया।
इसके बाद जयशंकर ने अमेरिका-पाकिस्तान संबंधों में हालिया सुधार का ज़िक्र किया, खासकर जनवरी 2025 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत के बाद से। उन्होंने कहा कि हर देश की संवेदनशीलता में अंतर उन मुद्दों में से एक है जो द्विपक्षीय संबंधों को प्रभावित करते हैं। जयशंकर ने पाकिस्तान का ज़िक्र करते हुए कहा भारत के लिए आतंकवाद का मुद्दा बहुत अहम है। हमें लगता है कि शायद ही कोई ऐसा देश हो जिसे किसी पड़ोसी देश की सोची-समझी और जानबूझकर अपनाई गई नीति के तहत इतने दशकों तक उस तरह के आतंकवाद का सामना करना पड़ा हो, जैसा हमने किया है। उन्होंने कहा कि अगर भारत की चिंताओं को समझा या सराहा नहीं जाता है, तो इसका असर अमेरिका के साथ उसके रिश्तों पर पड़ सकता है। उन्होंने कहा अगर कोई ऐसी बात जो हमारे लिए बहुत मायने रखती है, उसे लेकर पर्याप्त समझ, सराहना या सहानुभूति नहीं है, तो मुझे लगता है कि इससे भी समस्या पैदा होती है। अगर मेरा साथी मेरी किसी मुख्य चिंता को पूरी तरह से नहीं समझता है, तो ज़ाहिर है कि इसका असर रिश्तों पर पड़ता है।