By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Sep 16, 2020
उन्होंने कहा कि कृषि राज्य का विषय है जबकि केन्द्र सरकार ने इस संबंध में राज्यों से किसी प्रकार की सलाह नहीं ली। पायलट ने कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा किसान संगठनों एवं राजनैतिक दलों से भी इस सम्बन्ध में कोई राय-मशविरा नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार प्रारम्भ से ही किसान विरोधी रही हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में मोदी सरकार ने सत्ता में आते ही किसानों के लिए भूमि मुआवजा कानून रद्द करने के लिए एक अध्यादेश प्रस्तुत किया लेकिन राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस एवं किसानों के विरोध के कारण मोदी सरकार को पीछे हटना पड़ा। उन्होंने कहा कि कृषि उपज बाजार समिति (एपीएमसी) प्रणाली के समाप्त होने से कृषि उपज खरीद प्रणाली समाप्त हो जाएगी। किसानों को बाजार मूल्य के अनुसार न तो न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) मिलेगा और न ही उनकी फसल का मूल्य। उन्होंने कहा कि यह दावा सरासर गलत है कि अब किसान देश में कहीं भी अपनी उपज बेच सकता हैं।