सद्गुरु ने आपदाओं से निपटने के लिए भारत और चीन समेत पांच देशों के हिमालय बोर्ड की मांग की

By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Aug 31, 2026

भारतीय आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु जग्गी वासुदेव ने हिमालयी क्षेत्र में आपदाओं से निपटने के लिए सहयोग मजबूत करने के उद्देश्य से भारत, चीन, पाकिस्तान, नेपाल और भूटान को मिलाकर ‘हिमालय बोर्ड’ बनाने का आह्वान किया है। काठमांडू में रविवार को आयोजित ‘नेपाल के साथ एकजुटता’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सद्गुरु ने नेपाल के प्रधानमंत्री आपदा राहत कोष में एक करोड़ रुपये देने का भी संकल्प लिया। चीन-नेपाल सीमा के पास आई भीषण अचानक बाढ़ में सैकड़ों लोगों की मौत हो गई है और हजारों लोग लापता हैं।

इन यात्राओं के दौरान तीर्थयात्री काठमांडू से नेपाल होते हुए तिब्बत जाते हैं और यात्रा के कुछ हिस्से में पैदल भी चलते हैं। ईशा फाउंडेशन की ओर से रविवार को जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार, नेपाल में तैनात ईशा फाउंडेशन के तीन स्वयंसेवकों का भी अब तक कोई पता नहीं चल पाया है। सद्गुरु ने देशों के बीच हिमालयी क्षेत्र से जुड़े मुद्दों पर राजनीतिक सीमाओं से ऊपर उठकर सहयोग की जरूरत पर जोर दिया।

उन्होंने कहा, “पहाड़ आपकी राजनीतिक संबद्धता को नहीं जानते। वे यह भी नहीं जानते कि आप क्या कहते हैं या कौन-सी बोलते हैं।” बयान के अनुसार, उन्होंने इस संवेदनशील क्षेत्र में आने वाली आपदाओं से निपटने के लिए भारत, चीन, पाकिस्तान, नेपाल और भूटान को मिलाकर पांच देशों का ‘हिमालय बोर्ड’ बनाने का सुझाव दिया। सद्गुरु ने कहा, “हिमालय इस धरती की सबसे अद्भुत और भव्य प्राकृतिक विशेषता है।

साथ ही, यह बेहद संवेदनशील भी है।” उन्होंने ऐसी संस्था के तत्काल गठन की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा, “इन सभी देशों को मिलाकर एक निकाय बनना चाहिए, जहां से हिमालय की पर्वत शृंखलाएं गुजरती हैं।” उन्होंने कहा, “किसी ने नहीं सोचा था कि ऐसा हो जाएगा... लेकिन अब जब यह हो चुका है, तो हमें इस पर ध्यान देना चाहिए, क्योंकि यह ऐसी समस्या नहीं है जिसे नेपाल जैसा छोटा देश अकेले हल कर सके।” ‘नेपाल के साथ एकजुटता’ कार्यक्रम में आपदा से प्रभावित लोगों के समर्थन में काठमांडू में लोग एकजुट हुए। सद्गुरु ने तत्काल राहत से आगे बढ़कर हिमालय के प्रति साझा और दीर्घकालिक जिम्मेदारी निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि हिमालय देशों के बीच खींची गई राजनीतिक सीमाओं से परे है और इसका भविष्य उन सभी से जुड़ा है, जो इस पर्वतीय क्षेत्र पर निर्भर हैं।

राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण ने बताया कि अचानक आई बाढ़ में मरने वालों की संख्या बढ़कर 903 हो गई है।

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