Chai Par Sameeksha: भगवा उफान, विजय का तूफान, कांग्रेस का घमासान क्या राजनीतिक संदेश दे रहे हैं?

By अंकित सिंह | May 11, 2026

प्रभासाक्षी के साप्ताहिक कार्यक्रम चाय पर समीक्षा में इस सप्ताह हमने पश्चिम बंगाल की राजनीति और असम तथा तमिलनाडु के मुद्दे पर चर्चा की। हमने साफ तौर पर नीरज दुबे से पूछा कि पश्चिम बंगाल में भाजपा के लिए चुनौतियां क्या है? नीरज दुबे ने साफ तौर पर कहा कि भाजपा के लिए सबसे बड़ी चुनौती पश्चिम बंगाल में कानून व्यवस्था को दुरुस्त करना है। चुनाव तक तो पश्चिम बंगाल में कोई हिंसा नहीं हुई लेकिन उसके बाद जो हिंसा हुई है उसको निष्कर्ष तक पहुंचाना शुभेंदु अधिकारी सरकार की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। नीरज दुबे ने कहा कि पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा का एक लंबा इतिहास रहा है। ऐसे में उसे काले इतिहास को पीछा छोड़कर पश्चिम बंगाल को तरक्की के रास्ते पर आगे ले जाना होगा। 

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उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान भी हमने देखा कि शुभेंदु अधिकारी लगातार योगी मॉडल फॉलो करने की बात कर रहे थे, ऐसे में शुभेंदु अधिकारी पर फिलहाल पूरे देश की नजर रहने वाली है कि वह किस तरीके से पश्चिम बंगाल को आगे बढ़ाते हैं। इससे साथ ही उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी जो कर रहीं है वह सिर्फ और सिर्फ राजनीति के लिए कर रही हैं। अपनी प्रासंगिकता बचाए रखने के लिए कर रही है और 2029 में इंडिया ब्लॉक के भीतर किस तरीके से उठा पटक देखने को मिलेगी यह भी अभी से ही साफ तौर पर देखने को मिल गया है। नीरज दुबे ने कहा कि भले ही ममता बनर्जी फिलहाल इंडिया ब्लॉक की बात कर रही हैं लेकिन उन्होंने चुनाव से पहले कांग्रेस को अपने आसपास भटकने नहीं दिया था चाहे वह लोकसभा चुनाव हो या विधानसभा चुनाव हो। कांग्रेस के साथ ममता बनर्जी ने गठबंधन से सीधे तौर पर इंकार कर दिया था। हालांकि, आज ममता बनर्जी राजनीतिक परिस्थितियों बदलने के बाद कांग्रेस के साथ खड़ी होती दिखाई दे रही है।

नीरज दुबे ने साफ और कहा कि पश्चिम बंगाल में बदलाव का चुनाव था और वह बदलाव आ चुका है। लव एंड ऑर्डर के साथ-साथ पश्चिम बंगाल के खाली खजाने को कैसे भरा जाए, यह भी भाजपा के सामने चुनौती होगी। निवेश लाना, आदमी की जिंदगी में सुधार लाना बीजेपी को जल्द से जल्द दुरुस्त करना होगा। इसके साथ नीरज दुबे ने कहा कि विजय के लिए तमिलनाडु में सत्ता तक पहुंचना काफी मुश्किल रहा। भले ही उन्हें कांग्रेस का गठबंधन सहयोग मिल गया लेकिन अभी भी वह बहुमत के आंकड़ो तक नहीं पहुंच पाए थे जिससे की साफ तौर पर जाहिर होता है कि उनके लिए मुख्यमंत्री का पद काफी काटों भरा रहने वाला है। नीरज दुबे ने कहा कि राहुल गांधी के पास पश्चिम बंगाल में अपनी पार्टी को खड़ा करने का मौका था। लेकिन आपने तृणमूल कांग्रेस से हाथ मिलाकर उसे जगह को खाता कर दिया है। दूसरी ओर आपने तमिलनाडु में डीएमके के साथ धोखा किया। आप विजय के साथ चले गए। यह कहीं ना कहीं गठबंधन धर्म का एक तरीके से अपमान होता है।

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