By अंकित सिंह | Sep 29, 2026
आने वाले विधानसभा चुनावों से पहले उत्तर प्रदेश में सीट बंटवारे को लेकर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच तनाव बढ़ गया है। कांग्रेस गठबंधन में बराबर हिस्सेदारी की मांग करते हुए कम से कम 150 सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है। हालांकि, खबर है कि समाजवादी पार्टी सिर्फ़ 85 से 90 सीटें देने को तैयार है और उसने कांग्रेस से उम्मीदवारों की लिस्ट और ज़मीनी रिपोर्ट मांगी है। इस विवाद में रायबरेली और अमेठी जैसे पारंपरिक गढ़ों की सीटें भी शामिल हैं। दूसरी ओर सपा भी कांग्रेस पर दबाव बनाने की कोशिश में है। खबर है कि समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने 'इंडिया' गठबंधन की एक अहम बैठक में हिस्सा नहीं लेंगे। अगर ऐसा होता है तो कांग्रेस पर ज्यादा दबाव बन सकता है।
अखिलेश यादव ने कहा है कि 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के लिए कांग्रेस के साथ पार्टी का गठबंधन जारी रहेगा, लेकिन उन्होंने यह भी साफ़ किया कि सीटों के बंटवारे का फ़ैसला पहले से तय बंटवारे के आधार पर नहीं, बल्कि अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों में जीत की क्षमता के आधार पर किया जाएगा। यादव ने रायबरेली से SP के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव अभियान की शुरुआत करते हुए ये बातें कहीं। रायबरेली, कांग्रेस नेता और गठबंधन सहयोगी राहुल गांधी का लोकसभा क्षेत्र है। अपनी PDA रथ यात्रा के दौरान समर्थकों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि गठबंधन जारी रहेगा, लेकिन पार्टियों को सीटें जीतने की संभावना के आधार पर सीटों के बंटवारे पर बातचीत करनी होगी। समाजवादी पार्टी अपनी तैयारियों को लेकर साफ़ है। अगर गठबंधन में कोई दिक्कत आती है, तो वह सभी 403 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए तैयार है। समाजवादी पार्टी चाहती है कि कांग्रेस पहले उन उम्मीदवारों की पहचान करे जिनके जीतने की संभावना है और उन सीटों को भी चिह्नित करे जहां उसका संगठन मजबूत है और वह अकेले चुनाव लड़ सकती है। इसके बाद ही वह सीटों के बंटवारे पर आगे बातचीत करना चाहती है।
कांग्रेस में जल्दबाजी का माहौल है। पार्टी गठबंधन तो चाहती है, लेकिन वह इसे जल्द से जल्द पक्का करना चाहती है ताकि उसे पता चल सके कि वह कितने उम्मीदवार उतारेगी और किन सीटों पर चुनाव लड़ेगी। वहीं दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी सीट-बंटवारे को अंतिम रूप देने की कोई जल्दी नहीं दिखा रही है। समाजवादी पार्टी अपनी तैयारियां पूरी करने के बाद ही सीट-बंटवारे पर चर्चा करना चाहती है, जबकि कांग्रेस का मानना है कि सीटों को तय करने में किसी भी तरह की देरी से उसकी मोल-भाव करने की ताकत कमजोर हो जाएगी। पार्टी को डर है कि अगर सीट-बंटवारे की प्रक्रिया में देरी हुई, तो आखिरकार उसे अखिलेश यादव की शर्तों पर गठबंधन में शामिल होना पड़ सकता है।
दोनों पार्टियां उत्तर प्रदेश में सभी सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी का दावा कर रही हैं। हालांकि, समाजवादी पार्टी और कांग्रेस, दोनों ही यह बात जानती हैं कि उनमें से किसी में भी अकेले सभी 403 सीटों पर चुनाव लड़ने की क्षमता नहीं है। समाजवादी पार्टी पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कमज़ोर है, जबकि राज्य के बाकी हिस्सों में कांग्रेस की संगठनात्मक मौजूदगी न के बराबर है। नतीजतन, दोनों पक्ष दावे और जवाबी दावे कर रहे हैं, लेकिन वे यह भी जानते हैं कि साथ आए बिना किसी भी पक्ष के लिए ज़्यादा प्रगति करना मुश्किल है। गठबंधन की बातचीत शुरू करने से पहले दोनों ही पक्ष अपनी-अपनी सौदेबाजी की स्थिति को मज़बूत करना चाहते हैं।
कांग्रेस और सपा के बीच सहारनपुर, रायबरेली, अमेठी, बाराबंकी और सीतापुर समेत पांच जिलों को लेकर असली झगड़ा है। रायबरेली और अमेठी गांधी परिवार से जुड़ा रहा है। रायबरेली में 6 विधानसभा सीटें हैं। अमेठी में 4 विधानसभा सीटें हैं। समाजवादी पार्टी हर हाल में ऊंचाहार, हरचंदपुर और सरेनी जैसी सीटों पर अपनी दावेदारी बनाए रखना चाहती है। 2022 के चुनाव में अमेठी की अमेठी सदर और गौरीगंज में सपा के उम्मीदवार जीते थे। रायबरेली में ऊंचाहार, हरचंदपुर, सरेनी और बछरावां में सपा के उम्मीदवार जीते थे। 2027 में भी सपा यहां खुद लड़ना चाहती है। वहीं, कांग्रेस का अपना अलग दावा है।