By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Feb 10, 2024
मुंबई। स्वापक नियंत्रण ब्यूरो (एनसीबी),मुबंई के पूर्व क्षेत्रीय निदेशक समीर वानखेड़े ने उनके खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा दर्ज किये गये धन शोधन मामले के खिलाफ बंबई उच्च न्यायालय का रुख किया है। उन्होंने अपनी याचिका में दावा किया कि उनके द्वारा एनसीबी के वरिष्ठ अधिकारी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने के बाद ‘‘बदले की भावना से’’ यह मामला दर्ज किया गया है।
वानखेड़े ने यह भी अनुरोध किया है कि जब तक सीबीआई के मामले के खिलाफ उनकी याचिका पर सुनवाई और फैसला नहीं हो जाता, तब तक ईडी द्वारा की जा रही जांच पर रोक लगा दी जाए। सीबीआई और ईडी के खिलाफ उनकी याचिकाएं सुनवाई के लिए 15 फरवरी को न्यायमूर्ति पी.डी. नाइक की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष पेश की जा सकती है। वानखेड़े को सीबीआई मामले में पिछले साल उच्च न्यायालय की ओर से दंडात्मक कार्रवाई से अंतरिम सुरक्षा प्रदान की गई थी।
वानखेड़े ने ईडी मामले के खिलाफ दायर याचिका में दावा किया कि ईसीआईआर (प्रवर्तन सूचना रिपोर्ट) पिछले साल दर्ज की गई थी, जबकि वानखेड़े द्वारा पिछले माह दिल्ली की एक अदालत में एनसीबी के उप महानिदेशक ज्ञानेश्वर सिंह के खिलाफ अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत कार्रवाई की मांग को लेकर शिकायत दर्ज कराने के बाद अब जाकर मादक पदार्थ रोधी एजेंसी के कई अधिकारियों को समन जारी किया गया है। वानखेड़े ने दावा किया कि दिल्ली और मुंबई पुलिस दोनों ही सिंह के खिलाफ उनकी शिकायत की जांच करने में विफल रही ऐसे में उन्हें दिल्ली में अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा।
दिल्ली की एक अदालत ने छह फरवरी को दक्षिण पश्चिम दिल्ली के पुलिस उपायुक्त को नोटिस जारी कर वानखेड़े की शिकायतों पर की गई कार्रवाई रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया था। वानखेड़े ने ईडी के मामले के खिलाफ दायर अपनी याचिका में कहा कि सिंह और सत्ता में बैठे कुछ प्रभावशाली लोगों ने किसी मामले में फंसाने के लिए सीबीआई, ईडी और एनसीबी जैसी सभी एजेंसियों को उनके पीछे लगा दिया।
याचिका में कहा, ‘‘ याचिकाकर्ता (वानखेड़े) द्वारा जनवरी 2024 में भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारी ज्ञानेश्वर के खिलाफ दायर शिकायत का बदला लेने के लिए ईडी की ओर यह मामला दर्ज किया गया।’’ इसमें यह भी आरोप लगाया कि वानखेड़े को एक फोन कॉल आया था जिसमें उन्हें सिंह के खिलाफ दी गई शिकायतें वापस लेने और आईआरएस अधिकारी के पद से इस्तीफा देने की धमकी दी गई।