By अभिनय आकाश | Oct 28, 2026
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को पत्रकार निखिल वागले को 17 नवंबर को वर्चुअल तरीके से और शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत को उसी दिन व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया। यह मामला आपराधिक अवमानना से जुड़ा है, जो भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) और न्यायपालिका के खिलाफ उनकी टिप्पणियों के कारण दर्ज किया गया है। जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ ने वागले की बिना शर्त माफी और उनके सोशल मीडिया पोस्ट को हटाए जाने पर गौर करते हुए, इस मामले की सुनवाई दोपहर 2 बजे के लिए तय की। वागले की ओर से पेश हुईं वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह ने कहा कि उन्होंने अपनी टिप्पणी के लिए गहरा खेद जताया है और उनका अपनी बातों को सही ठहराने का कोई इरादा नहीं था। उन्होंने वागले के पांच दशक लंबे करियर का भी जिक्र किया और उनके मुंबई में रहने के कारण उन्हें वर्चुअल तरीके से पेश होने की अनुमति मांगी। हालांकि, SCBA ने बताया कि वागले ने पोस्ट पब्लिश होने के पांच दिन बाद उसे डिलीट कर दिया था। बेंच ने उन्हें फिलहाल वर्चुअल तरीके से पेश होने की अनुमति दी, लेकिन भविष्य में उन्हें व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश देने का विकल्प खुला रखा।
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) ने 15 अक्टूबर को वागले और राउत की टिप्पणियों को लेकर उनके खिलाफ आपराधिक अवमानना याचिका दायर की। इसके बाद, अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने 'कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट्स एक्ट' (न्यायालय अवमानना अधिनियम) के तहत इन दोनों के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने की सहमति दे दी है। यह विवाद उन बयानों से शुरू हुआ, जो पिछले हफ्ते विपक्षी दलों के एक प्रतिनिधिमंडल द्वारा CJI से मिलने का अनुरोध ठुकराए जाने के बाद दिए गए थे। CJI ने उनसे मिलने के बजाय, सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने के लिए कहा था।