By Ankit Jaiswal | Feb 03, 2026
नए मैनेजमेंट के दौर में जहां टेस्ट और वनडे टीम को उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ा है, वहीं टी20 फॉर्मेट भारतीय टीम के लिए अब तक सुकून की जगह बना हुआ है। बता दें कि जून 2024 में बारबाडोस में टी20 वर्ल्ड कप जीतने के बाद से भारत की छोटी फॉर्मेट में रफ्तार लगभग थमी नहीं है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, 2026 टी20 वर्ल्ड कप के लिए घोषित भारतीय टीम काफी संतुलित दिखती है। सूर्यकुमार यादव की कप्तानी में अभिषेक शर्मा की आक्रामक शुरुआत, मध्यक्रम में तिलक वर्मा, शिवम दुबे और रिंकू सिंह की ताकत, ऑलराउंड विकल्प के तौर पर हार्दिक पांड्या, अक्षर पटेल और वॉशिंगटन सुंदर, जबकि गेंदबाज़ी में जसप्रीत बुमराह और अर्शदीप सिंह जैसे नाम टीम को मजबूत बनाते हैं।
हालांकि, इस मजबूत तस्वीर के बीच एक सवाल लगातार गहराता जा रहा है और वह है संजू सैमसन की फॉर्म और उनकी प्लेइंग इलेवन में जगह। शुबमन गिल को बाहर रखकर सैमसन और अभिषेक शर्मा की ओपनिंग जोड़ी को तरजीह देना एक साहसिक फैसला माना गया था। शुरुआत में इस पर ज्यादा सवाल नहीं उठे क्योंकि 2024 के अंत और 2025 की शुरुआत में सैमसन का प्रदर्शन शानदार रहा था।
गौरतलब है कि उस दौर में सैमसन ने कई बड़े शतक लगाए और उनका स्ट्राइक रेट भी बेहद प्रभावशाली रहा है। लेकिन एशिया कप 2025 में ओपनिंग स्लॉट गंवाने के बाद उनका ग्राफ नीचे गया है। न्यूज़ीलैंड के खिलाफ हालिया सीरीज़ में उनका प्रदर्शन चिंता का विषय बन गया है, जहां पांच पारियों में वह महज 46 रन ही बना सके हैं।
इसी दौरान ईशान किशन की वापसी ने चयन समीकरण को और जटिल बना दिया है। बैकअप ओपनर और विकेटकीपर के तौर पर लौटे किशन ने मौके का पूरा फायदा उठाया है। तिलक वर्मा की गैरमौजूदगी में नंबर तीन पर उतरकर उन्होंने तेज़तर्रार पारियां खेली हैं और एक शतक भी जमाया है, जिससे उनका दावा मजबूत हुआ है।
मौजूद हालात में चयन की यह दुविधा अहम हो जाती है क्योंकि तिलक वर्मा, अक्षर पटेल और वॉशिंगटन सुंदर की वापसी से टीम संयोजन में बदलाव तय हैं। ऐसे में फॉर्म में चल रहे ईशान किशन को बाहर करना आसान फैसला नहीं माना जा रहा है, खासकर तब जब वह बाएं हाथ के बल्लेबाज़ होने के साथ विकेटकीपिंग का विकल्प भी देते हैं।
संजू सैमसन का कुल टी20 अंतरराष्ट्रीय रिकॉर्ड भी अब सवालों के घेरे में आ रहा है। 57 मैच खेलने के बाद यह नहीं कहा जा सकता कि उन्हें पर्याप्त मौके नहीं मिले हैं। न्यूज़ीलैंड सीरीज़ को उनके लिए निर्णायक माना जा रहा था, लेकिन वह इसे भुना नहीं सके हैं।
अब जब भारतीय टीम 7 फरवरी को वानखेड़े स्टेडियम में अमेरिका के खिलाफ अपने अभियान की शुरुआत करने जा रही है, तो सबसे बड़ा सवाल यही है कि टीम मैनेजमेंट पुराने भरोसे के साथ सैमसन को आगे बढ़ाता है या मौजूदा फॉर्म के आधार पर ईशान किशन को तरजीह देता है। यह फैसला न सिर्फ ओपनिंग जोड़ी तय करेगा, बल्कि घरेलू मैदान पर भारत के खिताब बचाव की दिशा भी तय करता दिख रहा हैं।