पक्ष और विपक्ष का टाइम पास (व्यंग्य)

By संतोष उत्सुक | Aug 24, 2024

बरसात ज्यादा पानी लेकर आ जाए तो इंसानों, नदियों, नालों, सडकों, पुलों, दोपहिया वाहन और कई जगह तो चौपहिया वाहनों को भी बहुत परेशानी होती है। प्रशासन ध्वस्त मान लिया जाता है। इस अवसर पर आम आदमी की तो बोलती बंद हो जाती है लेकिन ख़ास आदमी को लोकतान्त्रिक कर्तव्य के कारण कुछ न कुछ ज़रूर बोलना पड़ता है। इसी योजना के तहत विपक्षी नेताओं और सामाजिक संस्थाओं द्वारा प्रशासनिक प्रबंध ध्वस्त होने और आलोचना करते ब्यान दिए जाते हैं। लेकिन प्रशासन बहुत शक्तिशाली और समझदार  होता है वह खुद को ध्वस्त नहीं मानता बलिक अच्छा, मानवीय और चुस्त प्रबंधक मानता है। 

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अब सरकारी राजनीतिक पार्टी के मीडिया प्रवक्ता की बारी आई जो पहले से तैयार थे। उन्होंने विपक्ष के सवालों का ज़ोरदार और शोरदार ज़वाब देना ही था। यह उनका धार्मिक कर्तव्य था। उन्होंने कहा, बरसात के प्रबंधों बारे नेता प्रतिपक्ष के आरोपों को, एक सिरे से लेकर दूसरे सिरे तक ख़ारिज करता हूं। वे वास्तविकता से हमेशा अनजान रहते हैं। उन्हें क्या पता सरकार कैसे चलती है। सरकार, प्राकृतिक आपदा के नुकसान से आम आदमी को बचाने की दृढ़ मंशा के साथ दिन रात काम कर रही है। उच्च स्तरीय नेतृत्व आपदा प्रबंधन, पूरी क्षमता से जुटा हुआ है। विपक्षी नेता ने बढ़ा चढ़ा कर मनघडंत आरोप लगाए हैं लेकिन इस सन्दर्भ में एक भी ठोस प्रमाण नहीं दे पाए। सरकार आरोपों की परवाह नहीं करती। विपक्षी दल के नेता, आपदा प्रबंधन विभाग की क्षमता, प्रयास और परिणामों पर संदेह जताकर राज्य ही नहीं राज्य सरकार की छवि खराब करना चाहते हैं । हम ऐसा बिलकुल नहीं होने देंगे ।  हमें विभाग के हर कर्मचारी की मेहनत और नीयत पर पूरा भरोसा है। सरकार हर हालात से निपटने में पूरी तरह सक्षम है। हमारे पास पूर्ण बहुमत भी है।  

इन्होंने कहा, उन्होंने कहा और बरसात खत्म। बरसात के पानी का बहाव धीरे धीरे स्वत कम हो गया। टूटे फूटे घरौंदों की ईंटें कीचड़ में फंसी हैं, उखड़े हुए वृक्ष उदास हैं। जिन लोगों के प्रियजन या पशु बाढ़ में बह गए या मलबे में दब गए वे असली मदद के लिए वक़्त की तरफ देख रहे हैं। प्रशासन के लिए वाकई मुसीबत हो गई है। अफसरों और नेताओं को ऐसी ऐसी जगह के दिखावटी दौरे करने पड़ रहे हैं जहां वे बुरे ख़्वाब में भी जाना नहीं चाहते। विपक्ष फिर से ब्यान जारी करता है, अखबार की प्रभावशाली खबर बनती है लेकिन बात नहीं बनती। अगले दिन फिर सरकारी ब्यान छपता है कि प्रशासन ने विपदा के दौरान, ज़रूरत मंदों की दिन रात योजनाबद्ध मदद की लेकिन विपक्ष वालों ने आलोचना के इलावा कुछ नहीं किया। 

- संतोष उत्सुक

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