दिखावटी प्रेम (व्यंग्य)

By डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा ‘उरतृप्त’ | Feb 19, 2025

दुनिया की सबसे बड़ी दिखावट प्रेम है, और यह दिखावटी प्रेम का खेल आजकल हर जगह देखने को मिल रहा है। फेसबुक, इंस्टाग्राम और ट्विटर जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आप जब भी घूमेंगे, आपको हर तरफ "सच्चे प्रेम" के बड़े-बड़े पोस्टर लगे हुए दिखेंगे। ऐसे-ऐसे जोड़ों की तस्वीरें आपको मिलेंगी, जो एक-दूसरे के लिए इतनी प्रेम भरी बातें कर रहे होते हैं कि यदि आप अपने एकांत में यह सब देख रहे हैं, तो आपको यकीन हो जाएगा कि वे दोनों किसी महाकवि के रचनाकाल में जी रहे हैं।

सोचिए, जब भी आप किसी कपल को पार्क में टहलते हुए या कैफे में बैठकर "प्यार" भरी बातें करते हुए देखते हैं, तो क्या कभी आपने यह सोचा है कि शायद वे दोनों अभी-अभी झगड़ कर आए हैं? या फिर वे अपनी प्रेम कहानी की अगली कड़ी लिखने के लिए यहां आए हैं, ताकि सबके सामने अपनी ‘खुशहाल’ जिंदगी का दिखावा कर सकें? 

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क्या कभी आपने सोचा है कि यह दिखावटी प्रेम उस समय कितना हास्यास्पद हो जाता है जब दोनों की असली बातें आपस में मिलती ही नहीं हैं। एक बार मैं एक कपल के साथ एक पार्टी में गया था। दोनों ने सबके सामने ऐसे झगड़े किए जैसे वे बॉलीवुड के किसी ड्रामे का हिस्सा हों। लेकिन जैसे ही कैमरा उनके ऊपर आया, वे एक-दूसरे के गले में बाहें डालकर मुस्कुराने लगे। उस दिन मुझे समझ में आया कि प्रेम का यह दिखावा अब एक कला बन गया है।

दिखावटी प्रेम का एक और पहलू यह है कि लोग इसे अपनी पहचान बना लेते हैं। कोई भी व्यक्ति जो अपने प्रेम को केवल सोशल मीडिया पर दिखाता है, वह एक तरह से उस प्रेम को अपने जीवन का केंद्र बना लेता है। उसकी पहचान अब उस प्रेम से जुड़ गई है, और यह पहचान उसे हर दिन एक नए प्रेशर में डाल देती है। "क्या मैं आज कितनी सुंदर लग रही हूँ?", "क्या मैंने आज अपने प्रेमी के लिए एक बेहतरीन फोटो पोस्ट किया?", "क्या लोग हमारे रिश्ते को सही में मानते हैं?" ऐसे सवाल हर समय उसके दिमाग में घूमते रहते हैं। 

जब हम किसी भी रिश्ते की गहराई में जाते हैं, तो हमें यह पता चलता है कि असली प्रेम तो एक अदृश्य धागे की तरह होता है, जो हमें एक-दूसरे से जोड़ता है। लेकिन दिखावटी प्रेम में यह धागा कहीं नहीं होता। यह केवल इमोशनल ब्लैकमेलिंग और सस्ता नाटक है। जब दोनों के बीच कोई समस्या आती है, तो वे न केवल अपनी समस्या का सामना करने में असफल होते हैं, बल्कि वे अपने प्रेम को भी दांव पर लगाकर एक-दूसरे पर आरोप लगाने लगते हैं। 

दूसरी ओर, दिखावटी प्रेम का एक मजेदार पहलू यह भी है कि यह अक्सर प्रतियोगिता में बदल जाता है। क्या आपने कभी देखा है कि लोग कैसे एक-दूसरे से आगे निकलने के लिए प्रयास करते हैं? "मेरे प्रेमी ने मुझे एक महंगा उपहार दिया, इसलिए मुझे भी उसे एक ऐसा उपहार देना है जो उसे हैरान कर दे।" यह सोचते हुए, वे अपनी आर्थिक स्थिति को दरकिनार कर देते हैं। ऐसे में जो प्रेम का बुखार चढ़ा होता है, वह केवल दिखावे का होता है। 

कभी-कभी तो यह प्रेम तो बस एक प्रतिस्पर्धा बनकर रह जाता है, जिसमें प्रेमी-प्रेमिका एक-दूसरे को हराना चाहते हैं। यह देखा गया है कि कुछ लोग अपने रिश्ते को सिर्फ इसलिए आगे बढ़ाते हैं ताकि वे अपनी सहेलियों के बीच अपनी शान बढ़ा सकें। "देखो, मेरा प्रेमी मुझे कितने अच्छे तोहफे देता है," या "हमारे पास एक साथ कितनी शानदार तस्वीरें हैं," जैसे वाक्य इस दिखावटी प्रेम की पहचान बन जाते हैं।

इस सबके बीच असली प्रेम का क्या होता है? वह तो कहीं खो जाता है। लोग प्रेम को एक व्यवसाय के रूप में देखने लगते हैं, जहां मूल्य केवल प्रदर्शनों में ही होते हैं। असली भावनाएं, सच्चे जज़्बात और एक-दूसरे के प्रति सच्ची लगन अब केवल कहानियों की बात बनकर रह गई है।

तो, अगर आप भी इस दिखावटी प्रेम के चक्कर में हैं, तो जरा ठहरिए और सोचिए। क्या यह प्रेम है या केवल एक शो? क्या आप सच में अपने प्रेम के लिए तैयार हैं, या केवल दिखाने के लिए? प्रेम की असली भावना को समझें, क्योंकि दिखावटी प्रेम का यह खेल केवल आपको धोखा दे सकता है। 

- डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा ‘उरतृप्त’,

(हिंदी अकादमी, मुंबई से सम्मानित नवयुवा व्यंग्यकार)

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