By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Sep 12, 2026
सऊदी अरब ने शुक्रवार को कहा कि उसने ड्रोन हमले के एक दिन बाद एक प्रमुख तेल पाइपलाइन को बंद कर दिया है, वहीं यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने लाल सागर के दक्षिणी प्रवेश द्वार पर स्थित एक रणनीतिक द्वीप पर कब्जा कर लिया है। अधिकारियों ने कहा कि इन दोनों घटनाओं को ईरान युद्ध में एक नए मोर्चे के तौर पर देखा जा रहा है। हूती विद्रोहियों ने बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य के पास वर्षों में अपनी सबसे बड़ी क्षेत्रीय बढ़त हासिल की है।
यह पाइपलाइन एक दिन पहले हमले का शिकार हुई थी। सऊदी ऊर्जा मंत्रालय ने पाइपलाइन बंद करने के कदम को ‘‘एहतियाती’’ बताया। सऊदी विदेश मंत्रालय ने इस हमले के लिए इराक से आए कई ड्रोन को जिम्मेदार ठहराया।
सरकारी समाचार एजेंसी ‘सऊदी प्रेस एजेंसी’ में विदेश मंत्रालय के हवाले से जारी बयान में कहा गया कि वह जवाबी कार्रवाई नहीं करेगा, ताकि इराकी सरकार को ‘‘जरूरी कदम उठाने का मौका’’ मिल सके। इराक के प्रधानमंत्री अली अल-जैदी ने घटना की जांच का आदेश दिया है। सरकार के प्रवक्ता सबाह अल-नुमान ने शनिवार तड़के एक बयान में कहा कि अधिकारियों ने यह पता लगाया कि सऊदी अरब को निशाना बनाकर किए गए हमले मायसान प्रांत में स्थित एक स्थान से किए गए थे, जिसके बाद कमान के प्रमुख को पद से हटा दिया गया।
सऊदी अरब और अमेरिका ने जुलाई में इराक में ईरान समर्थित मिलिशिया समूहों पर बमबारी की थी। उन्होंने इन समूहों को सऊदी तेल प्रतिष्ठानों पर हुए ड्रोन हमलों के लिए जिम्मेदार ठहराया था। क्षेत्रीय अधिकारियों ने ‘एसोसिएटेड प्रेस’ को बताया कि हूतियों ने इराकी मिलिशिया समूहों को हमलों की योजना बनाने और उन्हें अंजाम देने में मदद की थी।