By अभिनय आकाश | Dec 23, 2024
2027 में भारत की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) के रूप में इतिहास रचने जा रहीं न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना ने रविवार को इस बात को रेखांकित किया कि यह मील का पत्थर नहीं है, बल्कि इसकी यात्रा सबसे अधिक मायने रखती है, क्योंकि उन्होंने इस बात के महत्व पर प्रकाश डाला कि उन्हें कैसे माना जाता है। एक न्यायाधीश और इस पद तक पहुँचने के वर्षों में उसने जो कार्य किया है। बेंगलुरु में जस्टिस ईएस वेंकटरमैया सेंटेनियल मेमोरियल लेक्चर के मौके पर जस्टिस नागरत्ना ने भूमिका के प्रति अपनी प्रतिबद्धता और उनके न्यायिक दर्शन पर उनके पिता, जस्टिस वेंकटरमैया के गहरे प्रभाव पर प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि न्यायाधीश वेंकटरमैया के घर पैदा होना सौभाग्य की बात है। मैं इस विरासत से अभिभूत हूं और यह मुझे उनके द्वारा स्थापित मानकों को बनाए रखने के लिए प्रेरित करती है। यह सब सकारात्मक है। जस्टिस बीवी नागरत्ना ने दो वकीलों की मुलाकात का एक दिलचस्प किस्सा भी सुनाया। इसमें उन्होंने बताया कि एक तो देश का राष्ट्रपति बना और दूसरा देश का चीफ जस्टिस। उन्होंने किस्सा सुनाते हुए कहा कि दिसंबर 1946 की बात हैं। अखिल भारतीय वकीलों का सम्मेलन नागपुर में आयोजित किया गया था। बैंगलौर और नागपुर के बीच कोई भी सीधी ट्रेन नहीं थी, इसलिए ग्रैंड ट्रंक एक्सप्रेस लेने के लिए मद्रास यानी चेन्नई जाना पड़ता था। रेल के डिब्बे में बैंगलोर और मद्रास से कुछ वकील सफर कर रहे थे। वह एक-दूसरे के दोस्त बन गए। सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस नागरत्ना ने बताया कि 43 साल बाद जून 1989 में दो वकील राष्ट्रपति भवन के अशोक हॉल में मिले। आर वेंकटरमन तो देश के राष्ट्रपति थे और उन्होंने ईएस वेंकटरमैया को देश के चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया के तौर पर शपथ दिलाई थी।