हिरासत में मौत को लेकर SC सख्त, पुलिस थानों में CCTV कैमरों की कमी पर लिया स्वतः संज्ञान

By अभिनय आकाश | Sep 04, 2025

सुप्रीम कोर्ट ने एक अखबार में छपी खबर के बाद स्वतः संज्ञान लेते हुए एक जनहित याचिका (पीआईएल) शुरू की, जिसमें भारत भर के पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरों की कमी का मुद्दा उठाया गया था। जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की बेंच ने कहा कि 2025 में पिछले 7-8 महीनों में अकेले राजस्थान में पुलिस हिरासत में 11 मौतें हुई हैं। इसी वजह से सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे पर तुरंत संज्ञान लिया। इससे पहले, 2020 में, सर्वोच्च न्यायालय ने देश भर के सभी पुलिस थानों में नाइट विज़न और ऑडियो क्षमता वाले सीसीटीवी कैमरे लगाना अनिवार्य कर दिया था। इस ऐतिहासिक फैसले में राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारों को पुलिस परिसरों के सभी महत्वपूर्ण बिंदुओं, जिनमें लॉक-अप और पूछताछ कक्ष शामिल हैं, पर सीसीटीवी कवरेज सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया था। न्यायालय ने ज़ोर देकर कहा कि फुटेज को कम से कम 18 महीने तक सुरक्षित रखा जाना चाहिए और हिरासत में यातना या मौत से संबंधित जाँच के दौरान उसे सुलभ बनाया जाना चाहिए। 

निगरानी और निवारण तंत्र

न्यायालय ने सीसीटीवी प्रणालियों की खरीद, स्थापना और रखरखाव सुनिश्चित करने के लिए राज्य और केंद्रीय निगरानी समितियों की भूमिका पर भी प्रकाश डाला। इसने निर्देश दिया कि गंभीर चोटों या हिरासत में मौतों से जुड़े मामलों में, पीड़ित या उनके परिवार मानवाधिकार आयोगों या अदालतों से संपर्क कर सकते हैं, जिनके पास जाँच और साक्ष्य संरक्षण के लिए सीसीटीवी फुटेज माँगने का अधिकार है।

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