Homi J Bhabha Death Anniversary: वैज्ञानिक होमी भाभा, जिनके Nuclear Program से डरता था America, मौत आज भी एक पहेली

By अनन्या मिश्रा | Jan 24, 2026

देश के महान वैज्ञानिक होमी जे भाभा का 24 जनवरी को एक विमान हादसे में निधन हो गया था। होमी जहांगीर भाभा एक भारतीय भौतिक वैज्ञानिक और मुंबई में टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च के संस्थापक निदेशक थे। होमी जे भाभा को भारत के परमाणु कार्यक्रम का जनक कहा जाता है। होमी जे भाभा ने देश को परमाणु ऊर्जा से संपन्न राष्ट्र बनाने का काम किया था। भाभा ने आने वाले समय को पहचान लिया था कि देश को परमाणु संपन्न राष्ट्र बनाने की जरूरत महसूस की थी। तो आइए जानते हैं उनकी डेथ एनिवर्सरी के मौके पर होमी जे भाभा के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में...


जन्म और परिवार

मुंबई के एक पारसी परिवार में 30 अक्तूबर 1909 को होमी जे भाभा का जन्म हुआ था। इनके पिता का नाम जहांगीर होर्मुसजी भाभा एक फेमस वकील थे। इनकी मां का नाम मेहरबाई टाटा था। भाभा ने अपनी उच्च शिक्षा इंग्लैंड से पूरी की थी। उन्होंने साल 1930 में कैंब्रिज विश्वविद्यालय से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में स्नातक की थी। इंजीनियरिंग के बाद होमी जे भाभा का रुझान भौतिकी में बढ़ गया था। उन्होंने साल 1935 में पीएचडी कैंब्रिज यूनिवर्सिटी से परमाणु भौतिकी से की थी।

इसे भी पढ़ें: Winston Churchill Death Anniversary: Nobel विजेता Winston Churchill का वो काला सच, जिसके कारण Bengal में 30 लाख लोगों ने तोड़ा दम

साइंटिफिक रिसर्च में हुए शामिल

सितंबर 1939 में सेकेंड वर्ल्ड वॉर शुरू होने से पहले होमी जे भाभा भारत लौट आए थे। युद्ध की वजह से उन्होंने भारत में रहने का फैसला किया और साइंटिफिक रिसर्च में शामिल हो गए। वह बेंगलुरु में भारतीय विज्ञान संस्थान में भौतिकी में पाठक का पद स्वीकार किया। इसकी अध्यक्षता नोबेल पुरस्कार विजेता सीवी रमन कर रहे थे। इस दौरान भाभा ने महत्वाकांक्षी परमाणु कार्यक्रम शुरू करने के लिए कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेताओं विशेष रूप से जवाहर लाल नेहरू को समझाने में अहम भूमिका निभाई थी।


टीआईएफआर की स्थापना की

फिर साल 1945 में मुंबई में टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च की स्थापना की। जोकि भारत में अग्रणी रिसर्च संस्थानों में से एक बन गया था। होमी जे भाभा के नेतृत्व में टीआईएफआर ने भौतिकी, गणित, रसायन विज्ञान और जीव विज्ञान के क्षेत्र में अहम योगदान दिया था। उन्होंने भारत के परमाणु कार्यक्रम की स्थापना में अहम भूमिका निभाई थी। होमी जे भाभा का मानना था कि राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने और देश की वैज्ञानिक क्षमताओं को आगे बढ़ाने के लिए देश का परमाणु संपन्न होना बेहद जरूरी है।


भारत का पहला परमाणु रिएक्टर

साल 1948 में भारत के परमाणु ऊर्जा आयोग की स्थापना के लिए होमी जे भाभा ने भारत सरकार के साथ मिलकर काम किया था। इससे पहले उन्होंने अध्यक्ष के रूप में भी काम किया था। होमी जे भाभा के नेतृत्व में साल 1956 में भारत के परमाणु ऊर्जा आयोग ने भारत का पहला परमाणु रिएक्टर अप्सरा विकसित किया था। होमी जे भाभा ने भारतीय मंत्रिमंडल की वैज्ञानिक सलाहकार समिति के सदस्य के रूप में काम किया था।


कई पुरस्कार और सम्मान

होमी जे भाभा ने मुंबई में भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र की स्थापना में अहम भूमिका निभाई थी। साल 1954 में भारत के परमाणु कार्यक्रम का समर्थन करने और विज्ञान और प्रौद्योगिकी के अन्य क्षेत्रों में रिसर्च करने के लिए की गई थी। उनको कई सम्मान और पुरस्कार मिले थे। साल 1954 में भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'पद्म भूषण' से सम्मानित किया गया था। फिर साल 1959 में उनको 'पद्म विभूषण' से सम्मानित किया गया था।


मृत्यु

वहीं 24 जनवरी 1966 को होमी जे भाभा की विमान दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी। इस दौरान वह एयर इंडिया के विमान में सफर कर रहे थे।

प्रमुख खबरें

Yes Milord। पूजा-नमाज के सुप्रीम आदेश के बाद भोजशाला में क्या हुआ?

पेंगुइन के साथ ग्रीनलैंड चले गए ट्रंप! एक Meme ने कैसे उड़ाई पूरे यूरोप की नींद

मर्दानी 3 से पहले रानी मुखर्जी का बड़ा धमाका: कपिल के मंच पर शाहरुख, सलमान और आमिर के साथ मचाएंगी गदर!

Assam के कछार में हेरोइन जब्त, व्यक्ति गिरफ्तार