SEBI ने Portfolio Managers के नियमों में किया बदलाव, IPO और विदेशी सिक्योरिटीज में निवेश को मंजूरी

By Ankit Jaiswal | Sep 24, 2026

अब पोर्टफोलियो प्रबंधन सेवाओं के जरिए निवेश करने वाले ग्राहकों के लिए निवेश के विकल्प बढ़ने वाले हैं। सेबी ने पोर्टफोलियो प्रबंधकों से जुड़े नए नियमों को मंजूरी दे दी है। इसके तहत पोर्टफोलियो प्रबंधक अब ग्राहकों के पैसे को आईपीओ, विदेशी प्रतिभूतियों और प्राथमिक बाजार में जारी होने वाले ऋण साधनों में भी लगा सकेंगे।

नई व्यवस्था के तहत पोर्टफोलियो प्रबंधक आईपीओ और ऋण बाजार में पहली बार जारी होने वाली प्रतिभूतियों में ग्राहकों की ओर से निवेश कर सकेंगे। इसके अलावा, डिस्क्रेशनरी पोर्टफोलियो प्रबंधन सेवा ग्राहकों की कुल प्रबंधित संपत्ति का 10 प्रतिशत तक निवेश-योग्य, गैर-परिवर्तनीय और बिना लिस्टिंग किए गए ऋण साधनों में लगा सकेगी। इसके लिए ग्राहक की सहमति जरूरी होगी।

सेबी ने शेयर बाजार में कारोबार होने वाले डेरिवेटिव साधनों में निवेश की सीमा को भी अधिक लचीला बनाया है। इसके तहत ग्राहक की प्रबंधित संपत्ति के 1.25 गुना तक इन साधनों में निवेश किया जा सकेगा।

विदेश में निवेश के लिए भी रास्ता आसान किया गया है। डिस्क्रेशनरी और गैर-विवेकाधीन दोनों तरह की सेवाएं देने वाले पोर्टफोलियो प्रबंधक विदेशी शेयर और ऋण प्रतिभूतियों के अलावा रियल एस्टेट निवेश न्यास, विदेशी म्यूचुअल फंड, कारोबार वाले कोष, इंडेक्‍स कोष और विदेशी सरकारी ऋण में निवेश कर सकेंगे। हालांकि, ऐसे निवेश विदेशी मुद्रा प्रबंधन कानून और भारतीय रिजर्व बैंक की उदारीकृत धन प्रेषण योजना के तहत होंगे।

गौरतलब है कि सेबी ने सीधे म्यूचुअल फंड में निवेश के लिए भी पोर्टफोलियो प्रबंधक मार्ग शुरू किया है। इसे म्यूचुअल फंड इकाइयों में निवेश के लिए पोर्टफोलियो प्रबंधक मार्ग यानी प्राइम नाम दिया गया है। इसके जरिए ग्राहक का पैसा म्यूचुअल फंड की सीधे निवेश वाली योजनाओं, कारोबार वाले कोष, सूचकांक कोष और विशेष निवेश कोष में लगाया जा सकेगा।

इस व्यवस्था के तहत न्यूनतम निवेश राशि 25 लाख रुपये होगी। नए ढांचे के तहत काम करने वाली संस्था के लिए कम से कम 2 करोड़ रुपये की शुद्ध संपत्ति जरूरी होगी। मुख्य अधिकारी के पास स्नातक डिग्री, सीएफए या सीए योग्यता के साथ प्रतिभूति बाजार का कम से कम दो साल का अनुभव और निर्धारित प्रमाणपत्र होना जरूरी होगा।

प्राइम में संबद्ध या समूह की एसेट प्रबंधन कंपनियों की योजनाओं में निवेश की अधिकतम सीमा 25 प्रतिशत रखी गई है। प्रबंधन शुल्क ग्राहक की कुल प्रबंधित संपत्ति का अधिकतम 1 प्रतिशत होगा, जबकि प्रदर्शन के आधार पर शुल्क लेने की भी अनुमति होगी। निकासी शुल्क से छूट का प्रावधान भी किया गया है।

सेबी ने स्वतंत्र कोष प्रबंधक की नई व्यवस्था भी बनाई है। ऐसे प्रबंधक पंजीकृत पोर्टफोलियो प्रबंधक के साथ मिलकर ग्राहकों के पोर्टफोलियो का संचालन कर सकेंगे, लेकिन उनकी सभी गतिविधियों की पूरी जिम्मेदारी पंजीकृत पोर्टफोलियो प्रबंधक की होगी। ग्राहक के स्वतंत्र कोष प्रबंधक के हटने या सेवा खत्म होने पर ग्राहक को बाहर निकलने का अनिवार्य विकल्प मिलेगा।

इसके अलावा, योग्य कोष प्रबंधकों को विदेश में निवेश करने वाले पात्र निवेश कोषों का प्रबंधन और सलाह देने की अनुमति होगी। भारतीय प्रतिभूतियों में निवेश करने वाले ऐसे कोषों के लिए सीमा मौजूदा विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक व्यवस्था के अनुसार बनी रहेगी। कुल मिलाकर नई व्यवस्था पोर्टफोलियो प्रबंधन सेवाओं में निवेश के दायरे को बढ़ाने और नियमों को आसान बनाने की दिशा में अहम बदलाव लेकर आई है।

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