SEBI ने वित्तीय इकाइयों के लिए जारी किया नया Advertising Code, हस्तियां अब विशेष उत्पाद नहीं बेचेंगी

By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Oct 12, 2026

बाजार नियामक सेबी ने शेयर ब्रोकर, समाशोधन निगम समेत वित्तीय बाजार मध्यस्थों के लिए साझा विज्ञापन संहिता अधिसूचित की है। इसके तहत इन इकाइयों को अपने ब्रांड या कंपनी के स्तर पर प्रचार के लिए जानी-मानी हस्तियों को शामिल करने की अनुमति दी गई है, लेकिन किसी खास वित्तीय उत्पाद या सेवा का समर्थन करने पर रोक लगाई गई है। साझा विज्ञापन संहिता शेयर ब्रोकर, डिपॉजिटरी प्रतिभागियों, निवेश सलाहकारों, शोध विश्लेषकों, ऑनलाइन बॉण्ड मंच संचालकों, पोर्टफोलियो प्रबंधकों और म्यूचुअल फंड तथा परिसंपत्ति प्रबंधन कंपनियों पर लागू होगी।

सेबी ने स्पष्ट किया कि हस्तियों के प्रचार पर होने वाले खर्च का बोझ ग्राहकों पर नहीं डाला जाएगा और न ही इसे म्यूचुअल फंड योजना से वसूला जाएगा। ऐसे विज्ञापनों में जरूरी घोषणा यानी अस्वीकरण भी शामिल करने होंगे। संबंधित इकाइयों को कुछ शर्तों के तहत विज्ञापनों में केवल पूर्व जोखिम और प्रतिफल के सत्यापन के लिए निर्धारित एजेंसी की रेटिंग या रैंकिंग का उपयोग करने की अनुमति होगी।

इन शर्तों के तहत रेटिंग या रैंकिंग का उचित स्पष्टीकरण विज्ञापन में ही देना होगा। इसके अलावा, पूर्व के जोखिम और प्रतिफल के सत्यापन के लिए निर्धारित एजेंसी या संबंधित इकाई की वेबसाइट का विवरण दिया जा सकता है, जिससे निवेशक इस बारे में अधिक जानकारी प्राप्त कर सकें। नियामक ने यह भी स्पष्ट किया है कि शैक्षणिक सामग्री को विज्ञापन संहिता के दायरे से बाहर रखा गया है।

सेबी ने डिजिटल माध्यमों के लिए लघु संदेश सेवा (एसएमएस), तत्काल सूचनाओं और पॉप-अप संदेशों में संक्षिप्त जानकारी देने की अनुमति दी है। हालांकि, इनमें जोखिम से संबंधित विस्तृत जानकारी वाले पृष्ठ के लिंक देना अनिवार्य होगा। सेबी ने कहा, ‘‘यदि कोई विज्ञापन एसएमएस, पॉप-अप, तत्काल सूचना या इसी तरह के किसी संक्षिप्त इलेक्ट्रॉनिक संदेश के रूप में है और माध्यम में अक्षरों की सीमा के कारण उसमें बुनियादी विवरण तथा अस्वीकरण देना संभव नहीं है, तो संबंधित इकाई की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध इन विवरणों और अस्वीकरण का लिंक दिया जाएगा।

इस उद्देश्य से सेबी ने मध्यस्थों से संबंधित नियमों में संशोधन किया है। बाजार नियामक ने एक अलग अधिसूचना में शोध विश्लेषकों और शोध इकाइयों के लिए संस्थागत निवेशकों के साथ बातचीत की रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखने की अनिवार्यता में भी ढील दी है। इस कदम से कारोबार करना आसान होने और शोध विश्लेषकों तथा शोध संस्थाओं पर अभिलेखों के रखरखाव से जुड़ी अनुपालन संबंधी जिम्मेदारियां कम होने की उम्मीद है।

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