By Ankit Jaiswal | Jun 25, 2026
आज के दौर में सामाजिक माध्यम पर सक्रिय इंफ्लुएंसरों का असर केवल मनोरंजन या जीवनशैली तक सीमित नहीं रह गया है। लाखों लोग निवेश, बचत और वित्तीय फैसलों से जुड़ी जानकारी भी इन्हीं माध्यमों के जरिए प्राप्त कर रहे हैं। इसी बदलते माहौल को ध्यान में रखते हुए भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड यानी सेबी ने एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पेश किया है, जो भविष्य में सामाजिक माध्यम प्रभावकों की भूमिका और जिम्मेदारियों को बदल सकता है।
मौजूद जानकारी के अनुसार यह प्रस्ताव केवल फिल्मी सितारों तक सीमित नहीं है। सेबी ने सेलिब्रिटी की परिभाषा को व्यापक बनाने का सुझाव दिया है, ताकि डिजिटल युग में प्रभाव डालने वाले सभी प्रमुख चेहरों को एक समान नियामकीय दायरे में लाया जा सके। यदि यह नियम लागू होता है तो निवेश और वित्तीय उत्पादों के प्रचार में शामिल इंफ्लुएंसरों को भी वही जिम्मेदारियां निभानी पड़ सकती हैं जो अभी तक पारंपरिक सेलिब्रिटी निभाते रहे हैं।
गौरतलब है कि सेबी ने सेलिब्रिटी की पहचान के लिए आठ अलग-अलग मानदंड प्रस्तावित किए हैं। इनमें से किसी एक शर्त को पूरा करने वाला व्यक्ति या आभासी पात्र इस श्रेणी में आ सकता है। प्रस्ताव के अनुसार प्रमुख फिल्मों, धारावाहिकों, दूरदर्शन कार्यक्रमों या वेब श्रृंखलाओं में मुख्य भूमिका निभाने वाले कलाकार भी इस दायरे में शामिल होंगे।
इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले खिलाड़ी भी सेलिब्रिटी माने जाएंगे। इसमें ओलंपिक खेल, एशियाई खेल, राष्ट्रमंडल खेल और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसारित होने वाले क्रिकेट तथा कबड्डी जैसे खेलों में हिस्सा लेने वाले खिलाड़ी शामिल हैं।
सेबी के मसौदे में समाचार प्रस्तुतकर्ताओं और कार्यक्रम संचालकों को भी जगह दी गई है। यदि किसी व्यक्ति ने कम से कम एक सत्र या दस कड़ियों तक प्रश्नोत्तरी, समाचार, नृत्य प्रतियोगिता, गायन प्रतियोगिता, हास्य कार्यक्रम, पाक कला कार्यक्रम या पुरस्कार समारोह का संचालन किया है, तो वह भी इस श्रेणी में आ सकता है।
एक अन्य महत्वपूर्ण प्रस्ताव यह है कि राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित प्रकाशनों द्वारा जारी किसी भी लोकप्रियता सूची में शीर्ष 50 स्थानों में शामिल व्यक्ति को भी सेलिब्रिटी माना जा सकता है। इससे पारंपरिक और डिजिटल दोनों क्षेत्रों के प्रभावशाली व्यक्तियों को नियामकीय दायरे में लाने का रास्ता खुल सकता है।
बता दें कि सेबी ने एआई आधारित मानव जैसे दिखने वाले आभासी इंफ्लुएंसर को भी इस परिभाषा में शामिल करने का प्रस्ताव दिया है। हाल के वर्षों में कई कंपनियां ऐसे डिजिटल चेहरों का उपयोग उत्पादों और सेवाओं के प्रचार के लिए कर रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि निवेश संबंधी सलाह और प्रचार में बढ़ती डिजिटल भागीदारी के बीच यह कदम निवेशकों की सुरक्षा को मजबूत कर सकता है। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है तो सामाजिक माध्यम प्रभावकों, कलाकारों, खिलाड़ियों और अन्य सार्वजनिक हस्तियों द्वारा किए जाने वाले वित्तीय प्रचार पर अधिक निगरानी और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सकेगी। इससे निवेशकों को अधिक पारदर्शी और जिम्मेदार जानकारी मिलने की उम्मीद की जा रही है।