By Ankit Jaiswal | Jun 03, 2026
देश के पूंजी बाजार में एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड ने राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड और उसके अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक राजेश मेहता के खिलाफ अंतरिम आदेश जारी किया है। सेबी ने कंपनी के वित्तीय विवरणों में कथित अनियमितताओं, धन के प्रवाह में गड़बड़ी और निवेशकों को गलत तस्वीर दिखाने के आरोप लगाए हैं।
बता दें कि राजेश एक्सपोर्ट्स देश की प्रमुख स्वर्ण प्रसंस्करण और आभूषण निर्यात कंपनियों में से एक मानी जाती है। ऐसे में कंपनी से जुड़े इस मामले ने निवेशकों और बाजार विशेषज्ञों का ध्यान अपनी ओर खींचा है।
सेबी के अनुसार वित्त वर्ष 2020-21 से 2024-25 के बीच कंपनी ने लगभग 15.15 लाख करोड़ रुपये के समेकित राजस्व को गलत तरीके से प्रस्तुत किया हो सकता है। यह राशि कंपनी द्वारा बताए गए कुल समेकित राजस्व का लगभग 99.80 प्रतिशत हिस्सा बताई गई है। नियामक का कहना है कि इन आंकड़ों के आधार पर कंपनी ने निवेशकों के सामने अपने कारोबार के आकार और वित्तीय स्थिति की वास्तविकता से अलग तस्वीर पेश की हैं।
गौरतलब है कि सेबी ने विशेष रूप से कंपनी की विदेशी सहायक इकाइयों से जुड़े राजस्व आंकड़ों पर सवाल उठाए हैं। जांच में पाया गया कि कंपनी के कुल समेकित राजस्व का 97 से 99 प्रतिशत हिस्सा विदेशी इकाइयों, विशेषकर वालकांबी एसए, से दिखाया गया था। हालांकि उपलब्ध वित्तीय दस्तावेजों में इन दावों की पर्याप्त पुष्टि नहीं मिल सकी हैं।
मौजूद जानकारी के अनुसार सेबी ने यह भी आरोप लगाया है कि राजेश मेहता द्वारा व्यक्तिगत स्तर पर किए गए वायदा कारोबार से जुड़े लेनदेन को कंपनी की बिक्री और खरीद के रूप में दर्शाया गया। इसके अलावा विनिमय दरों में उतार-चढ़ाव से हुई आय और व्यय को भी संचालन से प्राप्त आय और खरीद के रूप में दर्ज किया गया था। नियामक ने यह भी कहा कि म्यूचुअल फंड और सावधि जमा से प्राप्त ब्याज आय को भी कारोबार से प्राप्त आय के रूप में दिखाया गया।
जांच के दौरान अफ्रीका में स्वर्ण खदान में निवेश के दावे पर भी सवाल उठे हैं। सेबी का कहना है कि उपलब्ध वित्तीय अभिलेखों में ऐसे निवेश की पुष्टि नहीं हो सकी हैं।
एक अन्य गंभीर आरोप कंपनी के धन को राजेश मेहता और सिद्धार्थ मेहता के व्यक्तिगत बैंक खातों के माध्यम से स्थानांतरित करने को लेकर है। सेबी के अनुसार इन लेनदेन को संबंधित पक्ष लेनदेन के रूप में घोषित नहीं किया गया और न ही आवश्यक स्वीकृतियां ली गई थीं।
गौरतलब है कि नियामक ने यह भी कहा है कि जांच के दौरान कंपनी ने समेकित स्तर की जानकारी उपलब्ध कराने में सहयोग नहीं किया और अलग-अलग चरणों में विरोधाभासी जानकारी प्रस्तुत की हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए सेबी ने कंपनी के वैधानिक लेखा परीक्षकों की भूमिका की जांच के लिए राष्ट्रीय वित्तीय प्रतिवेदन प्राधिकरण को भी आदेश की प्रति भेजी है। साथ ही राजेश मेहता को अगले आदेश तक कंपनी के शेयरों की खरीद-बिक्री या किसी भी प्रकार के कारोबार से रोक दिया गया है। नियामक ने नए सिरे से फोरेंसिक लेखा परीक्षण कराने का भी निर्देश दिया है। फिलहाल निवेशकों की नजर इस मामले की आगे की जांच और संभावित कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।