IB की सीक्रेट रिपोर्ट, 20 दिन में 4 बार बॉर्डर Visit, अमित शाह कुछ बड़ा प्लान कर रहे हैं?

By अभिनय आकाश | May 29, 2026

भारत में कितने घुसपैठिए रह रहे हैं। पाकिस्तान, बांग्लादेश, म्यांमार, श्रीलंका से कितने घुसपैठिए भारत में घुस चुके हैं। सरकार ने हाई लेवल कमिटी ऑन डेमोग्राफिक चेंज यानी जनसंख्या में परिवर्तन पे उच्च स्तरीय समिति बनाने का ऐलान कर दिया है और जो नोटिफिकेशन आया है उसमें घुसपैठ यानी इनफिल्ट्रेशन को बार-बार दोहराया गया है। देश की सबसे बड़ी समस्याओं में एक समस्या तमाम राज्यों में चेंज हो रही डेमोग्राफी। वो बात चाहे असम की हो, पश्चिम बंगाल की हो, बात हो बिहार की, उत्तराखंड की, झारखंड की या फिर तमाम और राज्यों की। डेमोग्राफी परिवर्तन बहुत ज्यादा हुआ। ऐसे में बंगाल जीतने के बाद अब एक नई सिरे से प्लानिंग हो रही है। यह प्लानिंग कौन कर रहा है? देश के गृह मंत्री अमित शाह। अगले कुछ दिनों में वो कुछ बहुत बड़े कदम उठाने वाले हैं। एक हफ्ते के अंदर गृह मंत्री अमित शाह बॉर्डर वाले जिलों में तीन चार बार गए हैं।  एक बार त्रिपुरा गए। त्रिपुरा, मेघालय, आसाम, बंगाल। फिर वो बीकानेर, जैसलमेर में थे। यानी वेस्ट बाउंड्री से ले ईस्टर्न बाउंड्री तक लगातार यात्राएं कर रहे हैं। अमित शाह ने खुद को किसी प्रोजेक्ट में इतना इनवॉल्व किया है तो लोगों को सीरियस हो जाना चाहिए।

क्या-क्या स्टडी करना है और रिपोर्ट में क्या बताएगी उसको आठ पॉइंट्स में बताया गया है। अलग-अलग इलाकों में डेमोग्राफिक चेंज और अवैध घुसपैठ से पैदा हुई समस्याओं की स्टडी डेमोग्राफिक चेंज के पीछे के कारण क्या है? क्या बॉर्डर पार की घुसपैठ है? रोजगार के मौके या दूसरे सामाजिक और पर्यावरण से जुड़े कारण हैं? क्यों कुछ इलाकों में असामान्य तरीके से लोगों की बसावट बढ़ी है? या फिर प्लान करने में यह सब हो गया है। अलग-अलग धर्मों और सामाजिक समुदायों की आबादी में हो रहे बदलावों की स्टडी का फोकस भी उन पॉइंट्स पर है जहां देश की आबादी बढ़ने के सामान्य पैटर्न से अलग पैटर्न दिखाई दे रहा है। अब अवैध प्रवासियों की पहचान हिरासत और उन्हें डिपोर्ट करने यानी वापस भेजने के लिए आसान निष्पक्ष और तय समय वाली व्यवस्था बनाने के सुझाव भी मांगे गए हैं। और सीमा सुरक्षा जनसंख्या नियंत्रण और आइडेंटिफिकेशन को मजबूत करने के लिए नई व्यवस्था कैसे बने इस पर भी काम होगा। अवैध घुसपैठ और उससे पैदा हुए जनसंख्या असंतुलन से निपटने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बेहतर तालमेल के लिए सुझाव की बात भी कही गई है। जरूरत पड़ने पे जनसंख्या बदलाव और घुसपैठ से निपटने के लिए अन्य जरूरी सुझाव भी इसमें निहित है। ये सारे बिंदु पीआईबी के नोटिफिकेशन में लिखे हुए हैं।

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आईबी की रिपोर्ट में क्या कहा गया

गृह मंत्रालय के टेबल पर आईबी की रिपोर्ट आती है। रिपोर्ट में जानकारी दी गई कि जेएनजी आंदोलन के बहाने युवाओं को भड़काने की कोशिश में लगे लोग कौन हैं।  रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले कुछ सालों के पिछले 10-20 पत्थरबाजी की घटनाओं के पैटर्न को देखे तो ज्यादातर घुसपैठिए थे। पत्थरबाजी, आगजनी और सड़कों पर तोड़पोड़ की घटनाओं में बांग्लादेशी रोहिंग्याओं की संलिप्ता वाला भी इंसिडेंट जोड़ा गया है। आईबी की रिपोर्ट बताती है कि चाहे वो दिल्ली दंगे हो या नोएडा में हिंसा हो या कहीं भी अगर पत्थरबाजी होती है तो पत्थर फेंकने वालों की जब पहचान की गई तो इसमें बड़े पैमाने पर रोहिंग्या बांग्लादेशी पकड़े गए। ये इंटरनल सिक्योरिटी के लिए बहुत बड़ा खतरा है। 

ड्रग्स कार्टेल पर अटैक

दूसरा गृह मंत्रालय के पास एक और स्पेसिफिक रिपोर्ट है ये कि वेस्टर्न बाउंड्रीज में और ईस्ट में भी खास करके बंगाल में भी जो ड्रग्स का सारा कारोबार चल रहा है वो जो 15 किमी जो बॉर्डर के आसपास का एरिया है वो एक पड़ाव है। जैसे पाकिस्तान से किसी ने फेंका ड्रग्स पंजाब कि बाउंड्री में किसी ने फेंका। उसे कलेक्टर कर 15 किलोमीटर के अंदर और फिर वहां से डिस्ट्रीब्यूट किया जाता है। गृह मंत्रालय ने एक आर्डर पास किया है और उन्होंने कहा है कि किसी भी बॉर्डर के 15 किलोमीटर के अंदर जितने भी अवैध निर्माण है उसको तुरंत तोड़ा जाए। कुल 50 बीएसएफ के बॉर्डर से बीएसएफ जहां तैनात है वहां से 50 किमी तक पूरी पैनी नजर और हाई सिक्योरिटी होनी चाहिए। 

 घुसपैठ को लेकर क्या-क्या बातें सामने आई

आजादी के बाद से देखते हैं घुसपैठ को लेकर क्या-क्या बातें सामने आई। अंग्रेजी न्यूज़ वेबसाइट स्क्रॉल ने अपनी एक रिपोर्ट में गृह मंत्रालय के हवाले से लिखा है कि 1948 से 1961 के बीच करीब 31 लाख लोग जिनमें ज्यादातर हिंदू थे पूर्वी पाकिस्तान से भारत आए थे। पूर्वी पाकिस्तान 1971 में बांग्लादेश हो गया। उस समय असम के मुख्यमंत्री बीपी वाली ने बताया था कि जनवरी 1964 से जनवरी 1965 के बीच करीब 1.8 लाख शरणार्थी पूर्वी पाकिस्तान से असम पहुंचे हुए थे। 1997 में तब के गृह मंत्री इंद्रजीत गुप्ता ने तब कहा था कि भारत में करीब 1 करोड़ अवैध प्रवासी रह रहे हैं। यह इस तरह का पहला आधिकारिक बयान माना गया था। इंडिया टुडे मैगजीन ने गृह मंत्रालय के एक सूत्र के हवाले से कुछ आंकड़े छापे थे। तब के आंकड़ों के मुताबिक पश्चिम बंगाल में 54 लाख, असम में 40 लाख, त्रिपुरा में 8 लाख, बिहार में 5 लाख, महाराष्ट्र में 5 लाख, राजस्थान में 5 लाख और दिल्ली में 3 लाख अवैध प्रवासी बताए गए थे। इन सभी को मिलाकर कुल संख्या करीब 1 करोड़ 8,300 के आसपास बैठ रही थी। 2001 में माधव गोडबोले की अध्यक्षता वाली टास्क फोर्स ऑन बॉर्डर मैनेजमेंट की रिपोर्ट में यह आंकड़ा और बढ़ा हुआ दिखता है। उनकी रिपोर्ट के मुताबिक भारत में अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों की संख्या करीब 1.5 करोड़ बताई गई थी। रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि हर महीने लगभग 3 लाख लोग अवैध तरीके से भारत में घुस रहे हैं। 

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बंगाल के नए सीएम की डिटेक्ट डिटेन और डिपोर्ट पॉलिसी

पश्चिम बंगाल में नई सरकार के आने के बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने डिटेक्ट डिटेन और डिपोर्ट पॉलिसी का ऐलान किया। टारगेट पर अवैध घुसपैठिए बताए गए। नतीजा बंगाल के बॉर्डर्स पर दिख रहा है। शुभेंदु अवैध घुसपैठियों का मुद्दा चुनाव के पहले से उठाते रहे हैं। सिर्फ शुभेंदु नहीं बीजेपी के बड़े नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने भी घुसपैठ का मुद्दा अपनी लगभग हर चुनावी रैली में हर सभा में उठाया है। इस चुनाव ही नहीं 2021 के विधानसभा चुनाव के दौरान भी घुसपैठ को लेकर तीखे बयान देखने को मिले थे। सितंबर 2018 में बतौर बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों को दीमक बताया था और कहा था कि उनके नाम वोटर लिस्ट से हटाए जाएंगे। उन्होंने एक रैली में कहा था कि ये लोग गरीबों का हिस्सा खा रहे हैं। हमारी नौकरियां ले रहे हैं। इनके नाम मतदाता सूची से हटाए जाएंगे। पर बीजेपी सिर्फ बांग्लादेशी घुसपैठियों का मुद्दा ही नहीं रोहिंग्या मुसलमानों के खिलाफ भी मुखर रही है और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ तो इस मुद्दे को एक ऐसी चुनौती के रूप में देखता रहा है जो भारत के सामाजिक और राजनीतिक ढांचे को बदल सकता है। 5 अक्टूबर 2022 को विजय दशमी पर सर संघ संचालक मोहन भागवत ने कहा था कि जनसंख्या असंतुलन की वजह से देशों का बंटवारा हुआ है और इसके पीछे धर्म परिवर्तन एक बड़ा कारण रहा है। उन्होंने कहा कि करीब 50 साल पहले जब जनसंख्या का असंतुलन हुआ था तब हमें उसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़े थे। ऐसा सिर्फ हमारे साथ नहीं हुआ। आज के समय में ईस्ट तिमोर, साउथ सूडान और कोसोवो जैसे नए देश बने हैं। इसलिए जब जनसंख्या में असंतुलन होता है तो नए देश बनते हैं। देशों का विभाजन हो जाता है। इससे पहले भी आरएसएस के बड़े नेता जनसंख्या में अपने हिसाब से एक संतुलन की बातें करते आए हैं। पूर्व आरएसएस प्रमुख के सुदर्शन ने 2005 में कहा था कि परिवारों में तीन से कम बच्चे नहीं होने चाहिए। 

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